उत्तराखंड में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) समय पर न होने के कारण सरकारी और अशासकीय स्कूलों में कार्यरत हजारों तदर्थ (Ad-hoc) और संविदा शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। इस गंभीर संकट को देखते हुए शिक्षा विभाग और राज्य सरकार अब केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) की तर्ज पर उत्तराखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (UTET) को साल में दो बार आयोजित करने की तैयारी कर रही है।
मुख्य हाइलाइट्स (Key Highlights)
- नौकरी पर खतरा: राज्य के अशासकीय और प्राथमिक स्कूलों में तैनात हजारों शिक्षकों के पास तय समय सीमा के भीतर टीईटी (TET) सर्टिफिकेट न होने से उनकी सेवाएं समाप्त होने का खतरा बढ़ गया है।
- बड़ा बदलाव: शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देश पर अब विभाग साल में एक के बजाय दो बार UTET परीक्षा कराने के प्रस्ताव पर काम कर रहा है।
- विभागीय कार्रवाई: हाईकोर्ट के आदेशों और नियमों के तहत हाल ही में कई ऐसे शिक्षकों की सेवाएं समाप्त भी की गई हैं, जो निर्धारित समय में टीईटी पास नहीं कर पाए थे।
क्यों गहराया हजारों शिक्षकों की नौकरी पर संकट?
- नियमों की बाध्यता: शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के नियमों के अनुसार, प्राथमिक और जूनियर कक्षाओं में पढ़ाने वाले हर शिक्षक के लिए टीईटी (TET) पास होना अनिवार्य है।
- समय पर परीक्षा न होना: उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों में UTET परीक्षा नियमित रूप से या साल में दो बार आयोजित नहीं हो सकी। इस वजह से कई सेवारत शिक्षकों को अपनी योग्यता साबित करने के पर्याप्त मौके नहीं मिले।
- हाईकोर्ट का कड़ा रुख: उत्तराखंड हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद शिक्षा विभाग उन शिक्षकों पर कार्रवाई करने के लिए मजबूर है, जिन्होंने नौकरी में आने के बाद भी तय अवधि के भीतर टीईटी की परीक्षा पास नहीं की है। हाल ही में राज्य के विभिन्न जिलों में 60 से अधिक शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं, जिससे बाकी शिक्षकों में हड़कंप मचा हुआ है।
सरकार का नया प्लान: साल में दो बार होगी परीक्षा
शिक्षकों के इस संकट को दूर करने और भविष्य के अभ्यर्थियों को अधिक अवसर देने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लिया है:
- सीटीईटी की तर्ज पर व्यवस्था: केंद्र सरकार जिस तरह साल में दो बार केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) आयोजित करती है, ठीक उसी तरह अब उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद (UBSE) को भी साल में दो बार UTET (UTET-I और UTET-II) आयोजित करने की जिम्मेदारी दी जा रही है।
- प्रस्ताव पर काम शुरू: शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विभागीय अधिकारियों को इसके नियम और परीक्षा कैलेंडर तैयार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि साल में दो बार परीक्षा होने से बैकलॉग खत्म हो सके और सेवारत शिक्षकों को जल्द से जल्द अपनी नौकरी बचाने का मौका मिल सके।
शिक्षकों और अभ्यर्थियों को क्या होगा फायदा?
- नौकरी बचाने का अंतिम मौका: जिन शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है, उन्हें साल में दो बार परीक्षा होने से छह-छह महीने के अंतराल पर दो मौके मिलेंगे, जिससे वे अपनी पात्रता साबित कर सकेंगे।
- युवाओं को राहत: हर साल बीएड (B.Ed) और डीएलएड (D.El.Ed) की पढ़ाई पूरी करने वाले हजारों नए अभ्यर्थियों को भी अब सालभर इंतजार नहीं करना पड़ेगा और वे जल्द शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के लिए योग्य हो सकेंगे।





