दिग्गज भारतीय निशानेबाज (Shooter) और ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर के कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी में जन्मे और पले-बढ़े जसपाल राणा के इस आकस्मिक निधन से खेल जगत सहित पूरे उत्तराखंड राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है।
मुख्य हाइलाइट्स अंतिम सांस: नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के अनुसार, जसपाल राणा ने गुरुवार (11 जून) की रात दिल्ली के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली।
- बीमारी का कारण: जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ (ISSF) वर्ल्ड कप से लौटते समय फ्लाइट में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी थी, जिसके बाद दिल्ली में उनकी एंजियोप्लास्टी कर स्टेंट डाला गया था।
- उत्तराखंड का गौरव: उत्तरकाशी में 28 जून 1976 को जन्मे जसपाल राणा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और उत्तराखंड राज्य का नाम हमेशा ऊंचा रखा।
इलाज के दौरान दिल्ली के अस्पताल में तोड़ा दम
- जसपाल राणा हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख शहर में आयोजित वर्ल्ड कप में भारतीय शूटिंग दल के साथ बतौर हाई-परफॉर्मेंस कोच शामिल हुए थे।
- भारत वापसी की फ्लाइट के दौरान उन्होंने सीने में बेचैनी की शिकायत की, जिसे शुरुआत में उन्होंने एसिडिटी समझ लिया था।
- दिल्ली पहुंचने पर तबीयत ज्यादा बिगड़ने के कारण उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनके दिल में स्टेंट लगाया था।
- चिकित्सा प्रयासों के बावजूद उनके स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ और दिल से जुड़ी जटिलताओं के चलते उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
शानदार और ऐतिहासिक रहा खेल करियर
- जसपाल राणा ने मात्र 12 वर्ष की उम्र में साल 1988 में राष्ट्रीय स्तर पर अपना पहला रजत पदक जीतकर सनसनी मचा दी थी।
- उन्होंने साल 1994 में मिलान (इटली) में आयोजित वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप (जूनियर वर्ग) में विश्व रिकॉर्ड स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता था।
- अपने करियर के दौरान उन्होंने एशियाई खेलों (Asian Games) में 4 स्वर्ण सहित कुल 8 पदक और राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) में 9 स्वर्ण सहित कुल 15 पदक देश की झोली में डाले।
- साल 2006 के दोहा एशियाई खेलों में उन्होंने 25 मीटर सेंटर-फायर पिस्टल इवेंट में तत्कालीन विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए तीन स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था।
- उनके इन अभूतपूर्व योगदानों के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1994 में ‘अर्जुन पुरस्कार’ और 1997 में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ से नवाजा था।
बतौर कोच मनु भाकर को दिलाया ऐतिहासिक मुकाम
- सक्रिय खेल से संन्यास लेने के बाद जसपाल राणा ने नए खिलाड़ियों को तराशने के लिए कोचिंग का जिम्मा संभाला और वे भारतीय जूनियर पिस्टल टीम के मुख्य सूत्रधार बने।
- उनके मार्गदर्शन में ही भारत की स्टार निशानेबाज मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक 2024 में दो ऐतिहासिक कांस्य पदक (Double Bronze) जीतकर देश का नाम रोशन किया था।
- मनु भाकर के अलावा उन्होंने सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला और चिंकी यादव जैसे कई वैश्विक स्तर के शूटर्स को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।
- खेल जगत में उनके इसी महान योगदान को देखते हुए उन्हें प्रतिष्ठित ‘द्रोणाचार्य पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया था।
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और पूरे देश ने व्यक्त किया शोक
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए इसे भारतीय खेल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।
- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और खेल प्रेमियों ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य ने अपने सबसे चमकदार खेल रत्नों में से एक को खो दिया है।
- उनके साथी खिलाड़ी रहे ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि जसपाल राणा उस पीढ़ी के नायक थे जिसने भारत में शूटिंग के खेल को एक नया आकार दिया।





