नई दिल्ली – देश भर के रसायनज्ञ और फार्मासिस्टों ने ई–फार्मेसी यानी ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ बुधवार को देशव्यापी हड़ताल की। हड़ताल के कारण कई शहरों में दवा की दुकानों और फार्मेसी सेवाओं पर असर पड़ा और सामान्य जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
फार्मासिस्ट संघ का कहना है कि ई–फार्मेसी प्लेटफॉर्म पर दवा की ऑनलाइन बिक्री स्वास्थ्य सुरक्षा और मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है। उनका आरोप है कि बिना विशेषज्ञ की देखरेख के दवा की बिक्री मरीजों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
राष्ट्रीय फार्मासिस्ट संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री के कारण पारंपरिक फार्मेसियों के व्यवसाय पर भी असर पड़ा है। वे सरकार से मांग कर रहे हैं कि ई–फार्मेसी की निगरानी और नियमों को कड़ा किया जाए।
हड़ताल के दौरान कई राज्यों में फार्मासिस्ट ने अपनी दुकानों को बंद रखा और मरीजों को चेतावनी दी कि केवल आवश्यक दवाइयों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इससे अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को असुविधा का सामना करना पड़ा।
सरकार ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ई–फार्मेसी नियमों और लाइसेंसिंग प्रक्रिया के तहत संचालित होती हैं और मरीजों की सुरक्षा के लिए कई उपाय किए गए हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा कि वे फार्मासिस्ट संघ के सुझावों पर विचार कर सकते हैं और आवश्यक बदलाव लाने के लिए तैयार हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और ऑनलाइन दवा बिक्री का उद्देश्य मरीजों तक दवाइयों को आसानी से और तेज़ी से पहुँचाना है। लेकिन इस प्रक्रिया में उचित निगरानी और मानक लागू होना जरूरी है।
रसायनज्ञ संघ का कहना है कि वे अपनी मांगों पर अड़े रहेंगे और सरकार से सुरक्षा मानकों और पारंपरिक फार्मेसियों के हितों की रक्षा करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील करते हैं।
देशव्यापी हड़ताल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऑनलाइन दवा बिक्री और पारंपरिक फार्मेसी के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है। सरकार और फार्मासिस्ट दोनों ही इस पर ध्यान दे रहे हैं ताकि मरीजों की सुरक्षा और व्यवसाय दोनों का संरक्षण किया जा सके।





