वाशिंगटन। अमेरिका ने ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार में कथित संलिप्तता को लेकर मुंबई स्थित दो कंपनियों और उनसे जुड़े पांच भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान की तेल से होने वाली आय को सीमित करने और प्रतिबंधों से बचकर कारोबार करने वाले नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है। यह कदम अमेरिका के ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ का हिस्सा है।
इन दो कंपनियों पर हुई कार्रवाई
अमेरिकी विदेश विभाग ने एसएसपीएल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और समुद्र मरीन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को प्रतिबंधों के दायरे में रखा है। अमेरिका का आरोप है कि इन कंपनियों ने ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के आयात को सुविधाजनक बनाने में भूमिका निभाई।
एसएसपीएल सॉल्यूशंस से जुड़े ध्वनि वोरा और निसर्ग वोरा के अलावा समुद्र मरीन सर्विसेज से जुड़े केतन कोचिकर, भूपेंद्रसिंह साहू और हरिश्याम हरिहरन चुंडाकट्टिल पर भी कार्रवाई की गई है। इन लोगों को अपनी संबंधित कंपनियों से जुड़े लेनदेन करने से रोक दिया गया है।
ईरान की आय पर दबाव बनाने की कोशिश
अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि ईरानी पेट्रोलियम, पेट्रोलियम उत्पादों और पेट्रोकेमिकल कारोबार से जुड़े कई संस्थानों और व्यक्तियों पर कार्रवाई की गई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, संबंधित नेटवर्क के जरिए ईरान को लाखों डॉलर की आय हुई, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति को समर्थन मिला।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान को प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। अमेरिका का उद्देश्य ईरान के तेल कारोबार से होने वाली आय को सीमित करना है।
23 अक्टूबर तक कारोबार समेटने की अनुमति
अमेरिका ने समुद्र मरीन सर्विसेज को 23 अक्टूबर तक कुछ लेनदेन समेटने की अस्थायी अनुमति भी दी है। इस अवधि में कंपनी को मौजूदा कारोबारी गतिविधियां समाप्त करने का अवसर मिलेगा। इसे प्रतिबंधों के पूर्ण प्रभाव से पहले कारोबार समेटने की समय-सीमा माना जाता है।
भारतीय कारोबार पर क्या होगा असर?
प्रतिबंधों के कारण संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों के अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में आने वाली संपत्तियों तथा वित्तीय लेनदेन पर रोक लग सकती है। अमेरिकी संस्थाओं के साथ कारोबार और अंतरराष्ट्रीय भुगतान में भी कठिनाइयां आ सकती हैं।
हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंध अपने आप में भारतीय अदालत में दोषसिद्धि नहीं हैं। इनका व्यावहारिक प्रभाव संबंधित लेनदेन और लागू प्रतिबंध नियमों पर निर्भर करेगा।





