बीजिंग/वॉशिंगटन। अमेरिका और चीन के बीच चल रही कूटनीतिक खींचतान अब ईरान के मुद्दे पर और अधिक हिंसक हो गई है। चीन ने अमेरिका द्वारा लगाए गए उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि बीजिंग तेहरान को सैन्य सहायता प्रदान कर रहा है। चीनी विदेश मंत्रालय ने इन दावों को “पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत” बताते हुए वॉशिंगटन को सीधी चेतावनी दी है कि यदि इन आधारहीन आरोपों की आड़ में चीनी उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ (शुल्क) लगाया गया, तो चीन भी कड़े आर्थिक उपायों के साथ जवाबी कार्रवाई करेगा।
“आरोप फर्जी और आधारहीन”: चीन का आधिकारिक रुख
चीन ने मीडिया में चल रही उन रिपोर्टों पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिनमें ईरान के साथ उसके सैन्य सहयोग की बात कही गई है।
- जिम्मेदार निर्यातक: चीन ने स्पष्ट किया कि वह सैन्य उत्पादों के निर्यात के मामले में एक जिम्मेदार राष्ट्र की तरह व्यवहार करता है। बीजिंग के अनुसार, उनका रक्षा निर्यात पूरी तरह से चीनी कानूनों और अंतरराष्ट्रीय संधियों के दायरे में होता है।
- तथ्यों का अभाव: चीनी प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे आरोप केवल सनसनी फैलाने के लिए हैं और इनमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है। उन्होंने इन रिपोर्टों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन की छवि बिगाड़ने की साजिश करार दिया।
अमेरिका को जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
इस विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू व्यापारिक मोर्चे पर दी गई धमकी है। चीन ने साफ कर दिया है कि वह आर्थिक दबाव के आगे नहीं झुकेगा।
- टैरिफ पर टकराव: चीन ने अमेरिका को आगाह किया है कि अगर इन आरोपों को बहाना बनाकर चीनी सामानों पर आयात शुल्क (टैरिफ) बढ़ाया गया, तो वह चुपचाप तमाशा नहीं देखेगा। चीन अपनी अर्थव्यवस्था और अपने उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए “जरूरी और कड़े” कदम उठाएगा।
- व्यापार युद्ध का खतरा: विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह बयान दोनों महाशक्तियों के बीच एक नए ‘ट्रेड वॉर’ की शुरुआत कर सकता है, जिससे वैश्विक बाजार में अस्थिरता पैदा होने का खतरा है।
सैन्य निर्यात पर चीन की सफाई
अपने रक्षा सौदों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए चीन ने अपनी निर्यात नीति को पारदर्शी बताया।
- कठोर नियंत्रण प्रणाली: चीन का दावा है कि उसके पास सैन्य उत्पादों के निर्यात के लिए एक अत्यंत सख्त और व्यापक नियंत्रण प्रणाली है। वह यह सुनिश्चित करता है कि उसके द्वारा निर्यात किए गए उत्पाद किसी भी अवैध गतिविधि या अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन में शामिल न हों।
- वैश्विक नियमों का पालन: बीजिंग ने दोहराया कि वह किसी भी देश को अवैध तरीके से हथियार मुहैया नहीं कराता और हमेशा वैश्विक शांति व सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्राथमिकता देता है।




