नई दिल्ली/दुबई। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनावपूर्ण हालात के बीच शांति समझौते की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका के साथ किसी भी व्यापक समझौते तक पहुंचना अभी भी काफी दूर है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर बातचीत में प्रगति नहीं हुई तो सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत का दौर जारी था, जिसमें कुछ मामूली प्रगति के संकेत मिले थे। लेकिन ईरानी पक्ष ने दोहराया है कि उसके प्रमुख मुद्दों—जैसे परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा—पर ठोस सहमति के बिना कोई समझौता संभव नहीं है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए कहा है कि बातचीत को लंबे समय तक खींचा नहीं जा सकता। ट्रंप ने बयान में संकेत दिया कि यदि ईरान जल्द निर्णायक रुख नहीं अपनाता है, तो अमेरिका “कठोर कदम” उठाने के लिए तैयार है। उनके इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति पहले से ही अस्थिर पश्चिम एशिया को और अधिक अस्थिर कर सकती है। तेल बाजार और वैश्विक व्यापार पर भी इसका असर दिख रहा है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
ईरान की ओर से हालांकि बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए गए हैं, लेकिन उसने स्पष्ट किया है कि वह दबाव में आकर कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि किसी भी समझौते में देश की सुरक्षा और संप्रभुता से समझौता नहीं किया जाएगा।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और कई देश दोनों पक्षों से तनाव कम करने तथा कूटनीतिक रास्ता अपनाने की अपील कर रहे हैं।
स्थिति फिलहाल अनिश्चित बनी हुई है और आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह तनाव कूटनीति की ओर बढ़ेगा या टकराव की दिशा में।





