नई दिल्ली। इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री वाले विज्ञापनों के मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने Meta India के प्रबंध निदेशक और कंट्री हेड को बुधवार, 9 सितंबर को अपने समक्ष पेश होने के लिए तलब किया है।
यह कार्रवाई BBC Eye की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुई जांच का हिस्सा है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि इंस्टाग्राम पर ऐसे पेड विज्ञापन दिखाई दिए, जो बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री तक पहुंच का रास्ता दिखाते थे। NCPCR ने 3 जुलाई को मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए Meta Platforms Inc. से स्पष्टीकरण और संबंधित दस्तावेज मांगे थे। Meta ने करीब एक सप्ताह बाद अपना जवाब आयोग को सौंपा।
जांच में तकनीकी व्यवस्था पर भी सवाल
Meta के जवाब की समीक्षा के बाद NCPCR ने मामले की औपचारिक जांच शुरू करने का फैसला किया। आयोग यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि कथित विज्ञापन प्लेटफॉर्म की निगरानी और मॉडरेशन व्यवस्था से कैसे गुजर गए और इस पूरे मामले में कंपनी की क्या भूमिका रही। सुनवाई के दौरान तकनीकी प्रणालियों और एल्गोरिदम से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा होने की संभावना है।
POCSO के तहत रिपोर्टिंग को लेकर भी सवाल
मामले में बाल यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत अनिवार्य रिपोर्टिंग व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं। NCPCR ने पहले Meta से यह बताने को कहा था कि कथित आपत्तिजनक सामग्री की जानकारी मिलने के बाद पुलिस को इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई। वहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट मांगी है।
Meta ने पहले कहा है कि कंपनी बाल शोषण के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाती है और नियमों का उल्लंघन करने वाले विज्ञापनों व खातों को हटाया गया है। कंपनी के अनुसार, भारत में पिछले छह महीनों के दौरान उसके सिस्टम ने 1.6 लाख से अधिक संदिग्ध खातों को हटाया है।
अब NCPCR की सुनवाई में Meta India से पूरे मामले पर विस्तृत जवाब और स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।





