इस्लामाबाद: गहरे आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई के बीच पाकिस्तान सरकार एक बार फिर अपने रक्षा बजट में बड़े इजाफे की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आगामी वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान का रक्षा बजट लगभग 3000 अरब रुपये (पाकिस्तानी मुद्रा) तक पहुंच सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार की ओर से यह कदम सुरक्षा चुनौतियों और सैन्य आवश्यकताओं को आधार बनाकर लिया जा रहा है। हालांकि, इस संभावित बढ़ोतरी को लेकर देश के भीतर आर्थिक प्राथमिकताओं पर सवाल भी उठने लगे हैं, क्योंकि पाकिस्तान पहले से ही विदेशी कर्ज, महंगाई और राजकोषीय घाटे जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा हालात में आम जनता पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। खाद्य पदार्थों की कीमतें, ऊर्जा संकट और बेरोजगारी जैसे मुद्दे देश की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ रहे हैं। ऐसे में रक्षा बजट में वृद्धि को लेकर विशेषज्ञों और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि रक्षा खर्च में इतनी बड़ी वृद्धि की जाती है, तो इससे विकास योजनाओं और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों पर असर पड़ सकता है। कुछ विशेषज्ञों ने इसे “संतुलन बिगाड़ने वाला फैसला” भी बताया है।
हालांकि सरकार का तर्क है कि बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य और सीमाई तनाव को देखते हुए रक्षा तैयारियों को मजबूत करना आवश्यक है।
पाकिस्तान में यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है, जहां एक ओर सुरक्षा प्राथमिकताओं की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक स्थिरता को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं।
पश्चिम एशिया में पहले से जारी अस्थिर हालात के बीच यह खुलासा एक बार फिर यह दर्शाता है कि ईरान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीतियां लगातार बदल रही हैं और प्रमुख सहयोगियों के बीच सूचनाओं का अभाव कूटनीतिक तनाव को बढ़ा सकता है।




