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आरक्षण के ‘कोटे में कोटा’ पर बिहार NDA में घमासान, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी आमने-सामने

पटना, 3 सितंबर। बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण यानी ‘कोटे में कोटा’ का मुद्दा राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। एनडीए के दो प्रमुख दलित नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष कुमार सुमन आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा तथा अनुसूचित जातियों के भीतर सब-कोटा लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि आरक्षण का लाभ सभी वंचित समुदायों तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा है और कुछ जातियां इसका अपेक्षाकृत अधिक लाभ उठा रही हैं। मांझी ने सबसे पिछड़े वर्गों को आरक्षण का लाभ सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की वकालत की है।

वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने आरक्षण में बदलाव की मांग पर असहमति जताई है। उन्होंने आरक्षण को संवैधानिक अधिकार बताते हुए कहा कि इसमें इस तरह के बदलाव की मांग करने वालों को पहले अपने मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए। इसके बाद विवाद और तेज हो गया तथा चिराग ने मांझी और उनके बेटे से पद छोड़ने की मांग तक कर दी।

चिराग के बयान पर मांझी खेमे ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। संतोष सुमन ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि मंत्री पद छोड़ने की बात है तो पहले चिराग पासवान को ही पद छोड़ना चाहिए। मांझी ने भी आरक्षण की समीक्षा और वंचित वर्गों के लिए अलग हिस्सेदारी की जरूरत पर अपना रुख दोहराया।

बिहार में चुनावी माहौल के बीच एनडीए के भीतर यह विवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आरक्षण और दलित राजनीति का मुद्दा राज्य में लंबे समय से प्रभावशाली रहा है। ऐसे में सहयोगी दलों के प्रमुख नेताओं के बीच खुला मतभेद गठबंधन के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर असर डाल सकता है।

 

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