Saturday, February 14, 2026

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‘आतंक के साये में बांग्लादेश’: चुनाव से पहले शेख हसीना का मोहम्मद यूनुस पर तीखा हमला, अंतरिम सरकार को बताया ‘अवैध’

नई दिल्ली/ढाका: बांग्लादेश में होने वाले आगामी आम चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुँच गई है। देश से निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अंतरिम सरकार के प्रमुख डॉ. मोहम्मद यूनुस पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है। हसीना ने आरोप लगाया कि उनके हटने के बाद से बांग्लादेश ‘आतंक के दलदल’ में डूब गया है और कट्टरपंथी ताकतें पूरे देश को बंधक बना रही हैं। उन्होंने डॉ. यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार को असंवैधानिक बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर ध्यान देने की अपील की है।

‘लोकतंत्र के नाम पर आतंक का शासन’

एक निजी समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार और सोशल मीडिया संदेशों के माध्यम से शेख हसीना ने ढाका की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की।

  • कट्टरपंथियों को बढ़ावा: हसीना का आरोप है कि डॉ. यूनुस की सरकार प्रतिबंधित संगठनों और चरमपंथियों को जेल से रिहा कर रही है, जिससे देश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
  • अराजकता का माहौल: उन्होंने दावा किया कि वर्तमान प्रशासन के पास कानून-व्यवस्था पर कोई नियंत्रण नहीं है और अवामी लीग के कार्यकर्ताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है।

डॉ. मोहम्मद यूनुस पर साधा निशाना

नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. मोहम्मद यूनुस को आड़े हाथों लेते हुए शेख हसीना ने उन्हें ‘विदेशी ताकतों का मोहरा’ करार दिया।

  • संवैधानिक संकट: हसीना ने कहा कि बिना किसी जनादेश के सत्ता पर काबिज होना लोकतंत्र का अपमान है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस आधार पर अंतरिम सरकार महीनों से सत्ता का सुख भोग रही है, जबकि उनका मुख्य काम केवल निष्पक्ष चुनाव कराना था।
  • प्रतिशोध की राजनीति: उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. यूनुस प्रशासन उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें और उनके परिवार को राजनीतिक रूप से खत्म करने की साजिश रच रहा है।

अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता

शेख हसीना ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि बांग्लादेश में मंदिरों पर हो रहे हमलों और अल्पसंख्यकों के साथ हो रही ज्यादतियों पर दुनिया चुप क्यों है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बांग्लादेश में कट्टरपंथ को नहीं रोका गया, तो इसका सीधा असर पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर पड़ेगा।

चुनाव को लेकर अवामी लीग की रणनीति

निर्वासन में होने के बावजूद शेख हसीना अपनी पार्टी ‘अवामी लीग’ के नेताओं के साथ लगातार संपर्क में हैं।

  1. चुनाव में भागीदारी: उन्होंने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी हर हाल में चुनाव लड़ेगी, बशर्ते चुनाव निष्पक्ष हों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की निगरानी में कराए जाएं।
  2. कार्यकर्ताओं में जोश: हसीना के बयानों को चुनावों से पहले पस्त हो चुके अवामी लीग के कार्यकर्ताओं में फिर से जान फूंकने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

अंतरिम सरकार की प्रतिक्रिया

दूसरी ओर, डॉ. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने हसीना के इन आरोपों को ‘निराधार’ बताया है। सरकार का कहना है कि वे शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान हुए भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन की जांच कर रहे हैं और देश को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।

“बांग्लादेश आज एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ उसकी पहचान खतरे में है। डॉ. यूनुस के नेतृत्व में देश दशकों पीछे जा रहा है। जनता जल्द ही इस आतंक के शासन को उखाड़ फेंकेगी।” — शेख हसीना

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