वॉशिंगटन। टेक दिग्गज गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट ने अमेरिका के फ्लोरिडा और कैलिफोर्निया राज्यों में 3.2 करोड़ विशेष मच्छरों को छोड़ने की योजना बनाई है। पहली नजर में यह फैसला चौंकाने वाला लग सकता है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका उद्देश्य मच्छरों की संख्या बढ़ाना नहीं बल्कि खतरनाक बीमारियां फैलाने वाले मच्छरों की आबादी को कम करना है।
यह परियोजना अल्फाबेट की ‘डिबग’ (Debug) पहल के तहत चलाई जा रही है। इसके लिए अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) से अनुमति मांगी गई है। योजना के तहत केवल नर मच्छरों को छोड़ा जाएगा, जो इंसानों को नहीं काटते। इन मच्छरों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले ‘वोल्बाकिया’ (Wolbachia) बैक्टीरिया को शामिल किया गया है।
वैज्ञानिकों के अनुसार जब ये वोल्बाकिया संक्रमित नर मच्छर जंगली मादा मच्छरों के साथ प्रजनन करते हैं, तो उनके अंडे विकसित नहीं हो पाते। इससे अगली पीढ़ी के मच्छरों की संख्या कम होती जाती है और समय के साथ पूरी आबादी में उल्लेखनीय गिरावट आ सकती है।
इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य वेस्ट नाइल वायरस, डेंगू, जीका और अन्य मच्छरजनित बीमारियों के खतरे को कम करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक रासायनिक कीटनाशकों की तुलना में अधिक सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प साबित हो सकती है।
गूगल की इस तकनीक का परीक्षण पहले भी किया जा चुका है। कैलिफोर्निया और सिंगापुर में हुए प्रयोगों में मच्छरों की आबादी में बड़ी कमी दर्ज की गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में मच्छरों की संख्या 80 से 90 प्रतिशत तक घटाने में सफलता मिली थी।
हालांकि इस योजना को लेकर कुछ पर्यावरणविदों ने सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर जैविक हस्तक्षेप के दीर्घकालिक प्रभावों का सावधानीपूर्वक अध्ययन किया जाना चाहिए। फिलहाल EPA इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है और अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही परियोजना शुरू होगी।
यदि यह योजना सफल रहती है, तो इसे दुनिया में मच्छर नियंत्रण के सबसे बड़े वैज्ञानिक अभियानों में से एक माना जाएगा और भविष्य में अन्य देशों में भी इस मॉडल को अपनाया जा सकता है।




