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अमेरिका में अवैध प्रवासियों की मुश्किलें बढ़ीं, सुप्रीम कोर्ट ने निर्वासन रोकने वाला नियम बहाल करने से किया इनकार

वाशिंगटन। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की निर्वासन नीति को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने आव्रजन न्यायाधीशों को कुछ मामलों में निर्वासन की कार्यवाही अस्थायी रूप से रोकने का अधिकार बहाल करने की मांग खारिज कर दी है। इस फैसले से ट्रंप प्रशासन और टेक्सास राज्य के बीच हुए समझौते पर लगी रोक हटाने की मांग स्वीकार नहीं हुई, जिससे अमेरिका में निर्वासन का सामना कर रहे कई प्रवासियों के लिए कानूनी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। 

क्या है पूरा मामला?

विवाद आव्रजन मामलों में ‘एडमिनिस्ट्रेटिव क्लोजर’ नामक प्रक्रिया से जुड़ा है। इसके तहत न्यायाधीश कुछ परिस्थितियों में निर्वासन की सुनवाई को अस्थायी रूप से रोक सकते थे। इसका इस्तेमाल उन मामलों में भी किया जाता था, जहां संबंधित व्यक्ति की वीजा याचिका, कानूनी दर्जे या किसी अन्य अपील पर फैसला आना बाकी होता था।

पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने 2024 में इस प्रक्रिया को नियम के रूप में फिर से लागू किया था। लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने इस नियम का बचाव नहीं किया।

टेक्सास और ट्रंप प्रशासन के समझौते पर विवाद

जून 2026 में टेक्सास के अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन ने इस नियम को चुनौती देते हुए मुकदमा दायर किया। उनका तर्क था कि इस प्रक्रिया के कारण अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे लोगों के निर्वासन में अनिश्चितकालीन देरी हो सकती है।

इसके बाद टेक्सास और ट्रंप प्रशासन के न्याय विभाग ने एक समझौते के तहत नियम को समाप्त करने का अनुरोध किया। संघीय न्यायाधीश ने उसी दिन इस समझौते को मंजूरी दे दी, जिससे नियम पर देशव्यापी रोक लग गई।

तीन शहरों ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

बाल्टीमोर, न्यू हेवन और कोलंबस शहरों के साथ प्रवासियों को कानूनी सहायता देने वाले संगठन ‘सेंट्रो लीगल डे ला रजा’ ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की थी। उनका कहना था कि इस प्रक्रिया से उन प्रवासियों को राहत मिल सकती है, जो कानूनी दर्जा पाने की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि निर्वासन के डर से अपराध के पीड़ित पुलिस की मदद करने से पीछे हट सकते हैं।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर को उनकी आपातकालीन याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपने संक्षिप्त आदेश में फैसले का विस्तृत कारण नहीं बताया। 

आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से फिलहाल निर्वासन की कार्यवाही अस्थायी रूप से रोकने वाला नियम बहाल नहीं हो सका है। मामले से जुड़ी कानूनी चुनौती आगे निचली अदालत में जारी रह सकती है।

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