बेंगलुरु: अंतरिक्ष की कक्षाओं में बढ़ती भीड़ और मलबे (स्पेस डेब्रिस) ने भारतीय उपग्रहों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपनी ताज़ा ‘इंडियन स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस रिपोर्ट-2025’ (ISSAR-2025) में खुलासा किया है कि पिछले साल भारत के 53 ऑपरेशनल सैटेलाइट्स पर मलबे से टकराने का बड़ा खतरा मंडरा रहा था। हालांकि, इसरो के वैज्ञानिकों ने मुस्तैदी दिखाते हुए 18 बार उपग्रहों का रास्ता बदला और एक बड़े हादसे को टाल दिया।
भीड़भाड़ वाला क्षेत्र बना अंतरिक्ष
इसरो की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरिक्ष अब तेजी से एक भीड़भाड़ वाला क्षेत्र बनता जा रहा है, जो वैश्विक स्पेस एजेंसियों के लिए सिरदर्द बन गया है। वर्तमान में भारत के कुल 53 सक्रिय सैटेलाइट्स पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे हैं, जिनकी स्थिति इस प्रकार है:
- लो अर्थ ऑर्बिट (LEO): पृथ्वी से 500-1000 किमी की ऊंचाई पर भारत के 22 सैटेलाइट्स तैनात हैं। ये मुख्य रूप से वैज्ञानिक प्रयोगों और पृथ्वी की हाई-रेजोल्यूशन इमेजिंग (मैपिंग) के लिए इस्तेमाल होते हैं।
- जियोसिंक्रोनस अर्थ ऑर्बिट (GEO): लगभग 36,000 किमी की ऊंचाई पर 31 सैटेलाइट्स मौजूद हैं, जो देश की संचार व्यवस्था, मौसम पूर्वानुमान और नेविगेशन (नाविक) सेवाओं के लिए रीढ़ की हड्डी का काम करते हैं।
1.5 लाख अलर्ट और ISRO की मुस्तैदी
ISSAR-2025 के अनुसार, लो अर्थ ऑर्बिट में सैटेलाइट्स की बढ़ती संख्या और पुराने रॉकेटों के टुकड़ों के कारण ‘क्लोज एप्रोच’ (खतरनाक नजदीकी) की घटनाएं बढ़ी हैं।
- वैश्विक चेतावनी: यूएस स्पेस कमांड के कॉम्बाइंड स्पेस ऑपरेशंस सेंटर ने साल 2025 में करीब 1.5 लाख क्लोज एप्रोच अलर्ट जारी किए। ये अलर्ट तब जारी किए जाते हैं जब कोई अंतरिक्ष मलबा किसी सक्रिय सैटेलाइट के बेहद करीब (टकराने की दूरी तक) आ जाता है।
- रास्ता बदलकर बचाव: भारतीय सैटेलाइट्स को सुरक्षित रखने के लिए इसरो ने ‘कोलिजन अवॉइडेंस मैन्यूवर’ (Collision Avoidance Maneuver) का सहारा लिया। इसके तहत 18 मौकों पर सैटेलाइट्स के थ्रस्टर्स को फायर कर उनकी कक्षा (ऑर्बिट) को थोड़ा बदल दिया गया, जिससे मलबे के साथ होने वाली टक्कर टल गई।
क्यों चिंताजनक है यह स्थिति?
अंतरिक्ष में मलबे का एक छोटा सा टुकड़ा भी हजारों किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलते हुए किसी सैटेलाइट को पूरी तरह नष्ट कर सकता है। यदि भारत के संचार या मौसम संबंधी सैटेलाइट्स को नुकसान पहुँचता है, तो इससे देश की बैंकिंग, इंटरनेट और आपदा प्रबंधन जैसी सेवाएं ठप हो सकती हैं।





