नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिहाज से अहम माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया समझौते के बाद भारतीय एलएनजी (LNG) टैंकर ‘दिशा’ सुरक्षित रूप से इस संवेदनशील समुद्री मार्ग को पार कर गुजरात के तट पर पहुंच गया है।
यह टैंकर कतर के रास लफ्फान टर्मिनल से लगभग 62,370 टन एलएनजी लेकर भारत के दहेज टर्मिनल के लिए रवाना हुआ था। कई महीनों से पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सुरक्षा चिंताओं के कारण इस मार्ग पर शिपिंग गतिविधियां प्रभावित थीं, जिससे ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ा था।
सूत्रों के अनुसार, ‘दिशा’ उन चुनिंदा जहाजों में शामिल है जिन्होंने हाल के तनावपूर्ण हालात में होर्मुज से सुरक्षित पारगमन किया है। इस घटना को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह रास्ता देश के तेल और गैस आयात का प्रमुख समुद्री मार्ग है।
अमेरिका और ईरान के बीच हालिया शांति समझौते के बाद इस रणनीतिक जलमार्ग को फिर से खोलने की दिशा में संकेत मिले हैं। हालांकि, समुद्री सुरक्षा एजेंसियां अभी भी स्थिति को पूरी तरह स्थिर नहीं मान रही हैं और कई शिपिंग कंपनियां सावधानी बरत रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘दिशा’ की सुरक्षित यात्रा से अन्य भारतीय और विदेशी जहाजों के लिए भी मार्ग खुलने की उम्मीद बढ़ी है। इससे आने वाले दिनों में भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला सामान्य होने की संभावना मजबूत हुई है।
सरकारी और समुद्री अधिकारियों ने इसे एक सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि स्थिति में सुधार के साथ ही लंबित जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे बहाल हो सकती है।
हालांकि, शिपिंग उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि पूरी तरह सामान्य स्थिति बहाल होने में अभी समय लग सकता है, क्योंकि सुरक्षा और बीमा से जुड़े कई मुद्दे अभी भी बने हुए हैं।
कुल मिलाकर, ‘दिशा’ की सफल यात्रा को भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार के मोर्चे पर एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है।





