रियाद। यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है। सऊदी अरब के दक्षिणी इलाकों में हूतियों के बड़े हमलों के बाद रियाद ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। ताजा घटनाक्रम ने वर्ष 2022 में हुए युद्धविराम के बाद बनी अपेक्षाकृत शांति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
मंगलवार को हूतियों ने सऊदी अरब के खमीस मुशैत, अबहा, जिजान और नजरान समेत कई इलाकों को निशाना बनाया। हमलों में ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, हमलों में कम से कम 73 लोग घायल हुए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। कई ऊर्जा प्रतिष्ठानों और तेल से जुड़ी सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचा।
हमलों के बाद सऊदी अरब ने हूतियों के खिलाफ कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, हूतियों ने बुधवार को भी खमीस मुशैत, अबहा और जिजान पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। गठबंधन ने कहा कि वह देश की संप्रभुता, नागरिकों और राष्ट्रीय संपत्तियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सैन्य कदम उठाएगा।
यमन में भी तेज हुए हवाई हमले
हूतियों ने दावा किया है कि सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के कई प्रांतों में दर्जनों हवाई हमले किए। एपी के अनुसार, हूती समूह ने बुधवार को चार यमनी प्रांतों में 32 हवाई हमलों की बात कही। वहीं, यमन में जारी संघर्ष के कारण मानवीय स्थिति भी गंभीर होती जा रही है।
तेल आपूर्ति पर बढ़ा खतरा
सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है। ऐसे में तेल प्रतिष्ठानों पर हमले और क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ रहा है। हालिया घटनाक्रम के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है।
विशेषज्ञों को आशंका है कि यदि सऊदी अरब और हूतियों के बीच संघर्ष और बढ़ा, तो इसका असर यमन के साथ-साथ पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है।




