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हिजाब पर हाई कोर्ट के फैसले से असहमत ओवैसी, बोले- हमारे धर्म में क्या जरूरी है, यह हम तय करेंगे

हैदराबाद। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने स्कूल में हिजाब पहनने से जुड़ी याचिका खारिज करने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने फैसले को इस्लाम पर हमला बताते हुए कहा कि किसी धर्म में क्या आवश्यक है, यह तय करना अदालतों का काम नहीं है।

ओवैसी ने मंगलवार को हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि वह हाई कोर्ट के फैसले से सहमत नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 25 और 19 से जुड़े अधिकारों के विपरीत है। उनका कहना था कि धार्मिक आस्था के विषय में समुदाय को अपनी मान्यताओं के बारे में निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज के एक स्कूल की नाबालिग छात्रा की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने स्कूल की निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने कहा कि छात्रा यह साबित करने के लिए पर्याप्त धार्मिक या कानूनी सामग्री पेश नहीं कर सकी कि सिर पर स्कार्फ पहनना इस्लाम की ऐसी अनिवार्य धार्मिक प्रथा है, जिसके बिना उसकी आस्था प्रभावित होगी।

अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी शिक्षण संस्थान की ड्रेस कोड व्यवस्था समान, गैर-भेदभावपूर्ण और अनुशासन तथा संस्थागत पहचान बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की गई है, तो यूनिफॉर्म निर्धारित करने का अधिकार मुख्य रूप से संस्थान के पास है। पहले की कक्षाओं में स्कार्फ पहनने की अनुमति मिलने से छात्रा को स्कूल की मौजूदा ड्रेस नीति बदलवाने का स्थायी अधिकार नहीं मिल जाता।

ओवैसी ने कहा कि हिजाब को लेकर फैसला देते समय धार्मिक प्रथाओं की अनिवार्यता का प्रश्न उठाया गया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में लंबित सबरीमाला मामले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक प्रथाओं की आवश्यक प्रकृति से जुड़े मुद्दे पर शीर्ष अदालत में सुनवाई चल रही है।

इस मुद्दे पर हाई कोर्ट के फैसले के बाद धार्मिक स्वतंत्रता, संस्थागत ड्रेस कोड और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज हो गई है।

 

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