लेबनान सरकार ने मंगलवार (स्थानीय समयानुसार) को सेना से कहा कि वह एक ऐसी योजना बनाए, जिससे साल के अंत तक सिर्फ सरकारी संस्थाओं के पास ही हथियार हों। सरकार के इस कदम का उद्देश्य उग्रवादी समूह हिजबुल्ला को निरस्त्र करना है। यह फैसला प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने लगभग छह घंटे तक चली कैबिनेट मीटिंग के बाद लिया। यह घोषणा हिजबुल्ला के एक नेता के बयान के बाद आई, जिसमें उन्होने कहा था कि उनका समूह हथियार नहीं छोड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई हुई तो वे इस्राइल पर मिसाइल हमला कर सकते हैं। पीएम सलाम ने कहा कि सेना को इस महीने के अंत तक एक योजना बनाकर सरकार के सामने पेश करनी होगी। सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब लेबनान पर हिजबुल्ला को निरस्त्र करने का अमेरिकी दबाव है। अमेरिका चाहता है कि लेबनान सरकार हिजबुल्ला को हथियार छोड़ने के लिए मजबूर करे, खासकर तब जब यह समूह हाल ही में इस्राइल से 14 महीने लंबा युद्ध लड़ चुका है और काफी हद तक कमजोर हो चुका है। यह फैसला अमेरिकी दूत टॉम बैरक की जुलाई में हुई यात्रा के बाद लिया गया है, जिन्होंने ईरान समर्थित समूह को निरस्त्र करने के लिए लेबनान से ठोस कदम उठाने की अपील की थी।
नईम कासेम ने हथियार छोड़ने की मांग खारिज की
मंगलवार दोपहर (स्थानीय समयानुसार) हिजबुल्ला नेता नईम कासेम ने हथियार छोड़ने की मांग को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनका समूह अपने हथियार किसी भी हालत में नहीं छोड़ेगा और इस पर कोई समय सीमा नहीं मानी जाएगी। हिजबुल्ला का कहना है कि जब तक इस्राइल लेबनान के कुछ हिस्सों से पीछे नहीं हटता और रोजाना के हवाई हमले बंद नहीं करता, तब तक वह अपने हथियार छोड़ने की बात भी नहीं करेगा। इन हमलों में सैकड़ों लोग मारे या घायल हो चुके हैं।





