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हवाई सफर हुआ महंगा: एअर इंडिया ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर बढ़ाया ‘फ्यूल सरचार्ज’; जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा बोझ

नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी वैश्विक तनाव और विमानन ईंधन (ATF) की आसमान छूती कीमतों के बीच टाटा समूह के स्वामित्व वाली दिग्गज एयरलाइन एअर इंडिया (Air India) ने यात्रियों को बड़ा झटका दिया है। एयरलाइन ने अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ‘फ्यूल सरचार्ज’ (ईंधन अधिभार) बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह नया नियम 8 अप्रैल से प्रभावी हो गया है, जिससे अब हवाई टिकटों की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिलेगा।

 

एअर इंडिया ग्रुप का फैसला: एयर इंडिया एक्सप्रेस पर भी लागू

एअर इंडिया द्वारा लिया गया यह निर्णय न केवल मुख्य एयरलाइन बल्कि समूह की किफायती सेवा देने वाली कंपनी एअर इंडिया एक्सप्रेस (Air India Express) पर भी समान रूप से लागू होगा। यानी बजट यात्रा करने वाले यात्रियों को भी अब अपनी जेब और ढीली करनी होगी।

 

सरचार्ज की गणित: घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का विवरण

हवाई किराए में होने वाली इस बढ़ोतरी को निम्नलिखित श्रेणियों के आधार पर समझा जा सकता है:

उड़ान की श्रेणी न्यूनतम सरचार्ज अधिकतम सरचार्ज
घरेलू उड़ानें (Domestic) ₹299 ₹899
अंतरराष्ट्रीय उड़ानें (International) $24 (लगभग ₹2000) $280 (लगभग ₹23,500)

 

क्यों बढ़ाया गया सरचार्ज?

विमानन क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी युद्ध और होर्मुज संकट के कारण कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति बाधित हुई है।

  • ATF की बढ़ती कीमतें: विमानन ईंधन यानी एटीएफ की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि से एयरलाइनों के परिचालन लागत (Operating Cost) में भारी इजाफा हुआ है।
  • लागत का बोझ: एयरलाइन प्रबंधन का कहना है कि ईंधन की बढ़ती लागत का एक हिस्सा यात्रियों पर डालना उनकी मजबूरी बन गई है ताकि सेवाओं की गुणवत्ता और परिचालन को सुचारू रखा जा सके।

यात्रियों की जेब पर असर

8 अप्रैल या उसके बाद टिकट बुक करने वाले यात्रियों को अब बेस फेयर और टैक्स के अलावा यह बढ़ा हुआ सरचार्ज भी देना होगा। लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए यह बोझ ₹23,000 से भी अधिक हो सकता है, जो कि विदेश जाने वाले पर्यटकों और छात्रों के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती है।

“एअर इंडिया का यह कदम अन्य एयरलाइनों को भी फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने के लिए प्रेरित कर सकता है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट नहीं आई, तो आने वाले पर्यटन सीजन में हवाई सफर आम आदमी की पहुँच से और दूर हो सकता है।”

फिलहाल, एअर इंडिया के इस फैसले ने गर्मी की छुट्टियों में यात्रा की योजना बना रहे लोगों के बजट को बिगाड़ दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें स्थिर नहीं हुईं, तो अन्य निजी एयरलाइनें भी जल्द ही इसी तरह की घोषणाएं कर सकती हैं।

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