हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार के उपनगरीय क्षेत्र में एक भीषण सड़क हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से एक स्थानीय व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई, जिसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ग्रामीणों ने दुर्घटनास्थल पर ही मृतक का शव रखकर सड़क जाम कर दी, जिससे घंटों तक यातायात बाधित रहा। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मृतक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और आरोपी चालक की तत्काल गिरफ्तारी कर उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
हादसे का मंजर: अनियंत्रित रफ्तार ने ली जान
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हादसा उस समय हुआ जब पीड़ित सड़क पार कर रहा था:
- भीषण टक्कर: एक अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने पैदल जा रहे व्यक्ति को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। टक्कर के बाद चालक वाहन समेत मौके से फरार होने में कामयाब रहा।
- मौके पर जमावड़ा: दुर्घटना के तुरंत बाद आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में एकत्र हो गए। मृतक की पहचान स्थानीय निवासी के रूप में होते ही लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया।
प्रदर्शन और जाम: घंटों ठप रहा आवागमन
ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सड़क के बीचों-बीच धरना दे दिया:
- मुआवजे की मांग: ग्रामीणों का तर्क है कि मृतक अपने घर का इकलौता कमाने वाला सदस्य था, इसलिए सरकार को उसके परिवार के भरण-पोषण के लिए तत्काल आर्थिक सहायता की घोषणा करनी चाहिए।
- सुरक्षा के सवाल: प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इस मार्ग पर आए दिन तेज रफ्तार वाहनों के कारण हादसे होते रहते हैं, लेकिन प्रशासन ने यहां न तो स्पीड ब्रेकर बनवाए हैं और न ही पुलिस गश्त बढ़ाई है।
- पुलिस से तीखी नोकझोंक: सूचना मिलते ही मौके पर पहुँची पुलिस टीम ने जब शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने की कोशिश की, तो ग्रामीणों के साथ उनकी तीखी झड़प हुई। ग्रामीण बिना ठोस आश्वासन के शव उठाने को तैयार नहीं थे।
प्रशासन का आश्वासन और वर्तमान स्थिति
स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुँचे:
- सीसीटीवी से तलाश: पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और फरार वाहन चालक को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
- आर्थिक सहायता का भरोसा: प्रशासनिक अधिकारियों ने नियमानुसार आपदा कोष या अन्य सरकारी योजनाओं से परिवार को आर्थिक मदद दिलाने का लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीण जाम खोलने पर सहमत हुए।





