हरिद्वार: उत्तराखंड सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को दोहराते हुए हरिद्वार के जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) और उनके एक सहायक को ₹50,000 की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने यह रिश्वत एक राशन की दुकान के लाइसेंस नवीनीकरण और सुचारू संचालन के बदले मांगी थी। विजिलेंस की टीम ने शुक्रवार देर शाम योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर दोनों को रंगे हाथों दबोचा। आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और उनके आवासों व कार्यालयों की भी गहन तलाशी ली जा रही है।
कैसा था विजिलेंस का ‘ट्रैप’ और कैसे हुई गिरफ्तारी?
विजिलेंस मुख्यालय को एक शिकायतकर्ता ने सूचना दी थी कि उसकी उचित दर की दुकान (राशन शॉप) से संबंधित कार्य के निपटारे के लिए अधिकारी लगातार धन की मांग कर रहे हैं:
- शिकायत का सत्यापन: विजिलेंस ने पहले शिकायत की गोपनीय जांच की, जिसमें रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई।
- रंगे हाथों पकड़े गए: विजिलेंस की टीम ने शिकायतकर्ता को केमिकल लगे नोट देकर भेजा। जैसे ही जिला पूर्ति अधिकारी और उनके सहायक ने रिश्वत की रकम अपने हाथ में ली, पहले से तैनात विजिलेंस की टीम ने उन्हें दबोच लिया।
- हाथ पड़ते ही रंग बदला: पानी के घोल में हाथ धुलवाने पर आरोपियों के हाथ लाल हो गए, जो इस बात का वैज्ञानिक प्रमाण है कि उन्होंने रिश्वत के नोटों को छुआ था।
भ्रष्टाचार के जाल में बड़े अधिकारी
इस मामले में पकड़े गए अधिकारियों की पहचान और उनकी भूमिका का विवरण इस प्रकार है:
- जिला पूर्ति अधिकारी (DSO): विभाग के मुखिया होने के नाते उन पर जिले की खाद्य आपूर्ति व्यवस्था की जिम्मेदारी थी, लेकिन वे खुद ही अवैध वसूली के खेल में लिप्त पाए गए।
- सहायक (Assistant): आरोपी सहायक बिचौलिए की भूमिका निभा रहा था और रिश्वत की रकम को सेटल करने में मुख्य भूमिका निभा रहा था।
- गहन जांच: विजिलेंस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इन अधिकारियों ने पहले भी इस तरह की वसूली की है और क्या इसमें विभाग के अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं।
प्रशासनिक खेमे में खलबली
हरिद्वार जैसे महत्वपूर्ण जिले में इतने बड़े अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद कलेक्ट्रेट परिसर और जिला पूर्ति कार्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ है। जिलाधिकारी ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए विभाग को आंतरिक ऑडिट करने के निर्देश दिए हैं। शासन द्वारा अब दोनों आरोपियों को निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
विजिलेंस की अपील: “डरें नहीं, सूचना दें”
विजिलेंस के निदेशक ने जनता से अपील की है कि यदि कोई भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो तुरंत विजिलेंस हेल्पलाइन नंबर 1064 पर सूचना दें। शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
निष्कर्ष: सुशासन की दिशा में कड़ा संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ दी गई खुली छूट के बाद विजिलेंस की यह कार्रवाई एक नजीर पेश करती है। यह घटना दर्शाती है कि पद चाहे कितना भी बड़ा हो, कानून की पहुंच से बाहर नहीं है। हरिद्वार की इस घटना के बाद अब अन्य विभागों के दागी अधिकारियों में भी खौफ का माहौल है।





