नई दिल्ली। डिजिटल तकनीक और आईटी सेक्टर में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा संदेश देते हुए केंद्रीय रेल, संचार एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विदेशी सॉफ्टवेयर उत्पादों को छोड़कर स्वदेशी प्लेटफॉर्म अपनाने की अपील की है। उन्होंने विशेष रूप से तमिलनाडु स्थित भारतीय कंपनी जोहो (Zoho) का उदाहरण दिया, जिसने वैश्विक बाजार में भारतीय सॉफ्टवेयर की ताकत को स्थापित किया है।
मंत्री की अपील: स्वदेशी अपनाएं, विदेशी छोड़ें
वैष्णव ने कहा कि भारत के पास तकनीकी प्रतिभा और नवाचार की कोई कमी नहीं है। ऐसे में देश को विदेशी सॉफ्टवेयर उत्पादों पर निर्भर रहने के बजाय स्वदेशी कंपनियों को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने जोहो जैसे प्लेटफॉर्म का जिक्र करते हुए कहा कि यह कंपनी भारतीय तकनीक की वैश्विक स्तर पर सशक्त पहचान है।
क्या है जोहो?
जोहो कॉर्पोरेशन एक भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी है, जिसकी स्थापना 1996 में श्रीधर वेम्बु ने की थी। कंपनी का मुख्यालय चेन्नई और अमेरिकी कार्यालय कैलिफोर्निया में है।
• सेवाएं: जोहो क्लाउड आधारित बिज़नेस टूल और सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराता है, जिनमें ईमेल, कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट (CRM), अकाउंटिंग, टीम कोलैबोरेशन और ऑफिस प्रोडक्टिविटी सूट शामिल हैं।
• वैश्विक उपस्थिति: कंपनी के 180 से अधिक देशों में करोड़ों उपयोगकर्ता हैं।
• खासियत: जोहो पूरी तरह भारतीय इंजीनियरों और तकनीशियनों द्वारा विकसित किया गया प्लेटफॉर्म है। इसे “मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड” कहा जाता है।
आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम
आईटी मंत्री ने कहा कि जोहो जैसी कंपनियां भारत के स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी सेक्टर को नई दिशा दे रही हैं। सरकार चाहती है कि देश के छोटे-बड़े उद्यम, संस्थान और आम उपयोगकर्ता विदेशी विकल्पों के बजाय इन प्लेटफॉर्म्स को प्राथमिकता दें। इससे न केवल भारतीय उद्योग को मजबूती मिलेगी, बल्कि देश की डिजिटल संप्रभुता भी सुरक्षित होगी।
भारतीय कंपनियों को बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह रुख भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त दिला सकता है। जोहो के अलावा कई और स्टार्टअप और टेक फर्में हैं जो विदेशी सॉफ्टवेयर के विकल्प उपलब्ध करा रही हैं।





