Monday, January 12, 2026

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन: ऋषिकेश में वन भूमि की घेराबंदी शुरू; विरोध की आशंका के बीच भारी पुलिस बल तैनात

ऋषिकेश/देहरादून: उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के कड़े निर्देशों के अनुपालन में ऋषिकेश के विवादित वन क्षेत्रों में वन विभाग ने तारबाड़ (Fencing) का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण और अवैध कब्जों को रोकने के लिए की जा रही इस कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल और पीएसी (PAC) तैनात कर दी है।

शीर्ष अदालत का कड़ा रुख

यह पूरी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के उस हालिया आदेश के बाद की जा रही है, जिसमें वन भूमि के संरक्षण को लेकर राज्य सरकार और वन विभाग को फटकार लगाई गई थी।

  • अतिक्रमण पर प्रहार: अदालत ने स्पष्ट किया था कि पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में वन भूमि पर कोई भी अवैध निर्माण या गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
  • समय सीमा का निर्धारण: कोर्ट ने प्रशासन को निर्धारित समय के भीतर विवादित वन क्षेत्रों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित (Fence) करने के निर्देश दिए थे।

भारी सुरक्षा के बीच घेराबंदी

ऋषिकेश के संवेदनशील इलाकों, विशेषकर गंगा तट से सटे वन क्षेत्रों में सुबह से ही वन विभाग की टीमें जेसीबी और तारबाड़ के सामान के साथ पहुंच गईं।

  • सुरक्षा घेरा: स्थानीय पुलिस के साथ-साथ अतिरिक्त सुरक्षा बलों को इसलिए तैनात किया गया है क्योंकि पूर्व में ऐसी कार्रवाइयों का स्थानीय लोगों और अतिक्रमणकारियों द्वारा उग्र विरोध किया जाता रहा है।
  • धारा 144 की संभावना: संवेदनशील स्थलों पर सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है ताकि तारबाड़ का कार्य बिना किसी बाधा के पूरा हो सके।

प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी

वन विभाग के उच्चाधिकारी खुद मौके पर मौजूद रहकर कार्य की प्रगति का जायजा ले रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार:

  1. सीमांकन का कार्य: तारबाड़ लगाने से पहले राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम ने भूमि का सटीक सीमांकन (Demarcation) किया है।
  2. अवैध कब्जे हटेंगे: तारबाड़ के दायरे में आने वाले किसी भी कच्चे या पक्के अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की प्रक्रिया भी साथ-साथ चलाई जा सकती है।
  3. पारिस्थितिकी का संरक्षण: इस कदम से जंगली जानवरों के गलियारों (Corridors) को सुरक्षित करने और वनों के कटाव को रोकने में मदद मिलेगी।

स्थानीय लोगों में हलचल

प्रशासन की इस अचानक और बड़ी कार्रवाई से क्षेत्र में रहने वाले लोगों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। कई लोग अपनी संपत्तियों और व्यवसायों को लेकर चिंतित हैं, जो वन भूमि के आसपास स्थित हैं। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल शीर्ष अदालत के आदेशों का पालन कर रहा है और कानून का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष: वन संपदा की सुरक्षा प्राथमिकता

ऋषिकेश में शुरू हुई यह घेराबंदी राज्य के अन्य हिस्सों के लिए भी एक संदेश है कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार का कब्जा अब बर्दाश्त नहीं होगा। वन विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में जिले के अन्य संवेदनशील वन क्षेत्रों में भी इसी तरह का अभियान चलाया जाएगा।

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