इस्लामाबाद/काबुल (19 मार्च, 2026): पिछले कई दिनों से सीमा पर जारी खूनी संघर्ष के बीच पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सरकारों ने एक बड़े फैसले के तहत एक सप्ताह के युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा की है। डूरंड रेखा (Durand Line) पर तनाव और गोलाबारी के कारण दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई थी, लेकिन पवित्र त्योहार ईद-उल-फितर को देखते हुए दोनों पक्षों ने अस्थायी रूप से हथियार डालने पर सहमति जताई है। हालांकि, यह शांति केवल सात दिनों के लिए है और दोनों पक्षों ने स्पष्ट किया है कि ईद के अवकाश के तुरंत बाद सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू की जा सकती है।
ईद के सम्मान में ‘सीजफायर’: शांति का अस्थायी प्रयास
दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों द्वारा जारी संयुक्त और अलग-अलग बयानों में इस युद्धविराम की रूपरेखा स्पष्ट की गई है:
- मानवीय आधार: अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने कहा कि रमजान के समापन और ईद की खुशियों में खलल न पड़े, इसलिए सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है।
- पाकिस्तान का रुख: पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उनकी सेना अगले सात दिनों तक अफगान सीमा पर कोई आक्रामक कार्रवाई नहीं करेगी, ताकि लोग शांतिपूर्वक त्योहार मना सकें।
- सप्लाई लाइन को राहत: युद्धविराम के दौरान सीमावर्ती व्यापारिक रास्तों को भी सीमित समय के लिए खोला जा सकता है, जिससे फंसे हुए आम नागरिकों और जरूरी सामानों की आवाजाही हो सके।
तनाव की जड़: क्यों भिड़े हैं दोनों पड़ोसी?
पिछले कुछ हफ्तों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद ने हिंसक रूप ले लिया है:
- आतंकवाद और टीटीपी: पाकिस्तान का आरोप है कि तालिबान शासित अफगानिस्तान ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (TTP) के आतंकियों को पनाह दे रहा है, जो पाकिस्तानी ठिकानों पर हमले कर रहे हैं।
- सीमा पार गोलाबारी: जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर हवाई हमले और आर्टिलरी से बमबारी की है, जिसमें कई अफगान नागरिकों की मौत हुई है।
- तालिबान का पलटवार: अफगान सेना ने भी भारी हथियारों के साथ पाकिस्तानी सीमा चौकियों को निशाना बनाया है, जिससे सीमावर्ती इलाकों से हजारों लोग पलायन कर चुके हैं।
‘ईद के बाद फिर शुरू होगा युद्ध’: भविष्य की चिंता
इस युद्धविराम की सबसे बड़ी चिंता इसकी समयसीमा और शर्तों को लेकर है:
- रणनीतिक विराम: रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई ‘शांति समझौता’ नहीं बल्कि एक ‘रणनीतिक ब्रेक’ है। दोनों सेनाएं इस एक हफ्ते का उपयोग अपनी रसद (Supplies) और सैन्य तैनाती को फिर से मजबूत करने के लिए कर सकती हैं।
- कठोर चेतावनी: दोनों देशों के सैन्य नेतृत्व ने यह संकेत दिया है कि ईद के बाद यदि कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो युद्ध और भी भीषण रूप ले सकता है। अफगानिस्तान ने अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए ‘अंतिम सांस तक लड़ने’ की बात कही है।




