नई दिल्ली। नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर चल रहे सीजेपी (CJP) आंदोलन के बीच संगठन को कथित विदेशी फंडिंग मिलने के आरोपों ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। इस मामले पर पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा है कि उसके पास इन आरोपों के संबंध में साझा करने के लिए कोई विशिष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान जब सीजेपी को विदेशी आर्थिक सहायता मिलने और प्रदर्शन के पीछे बाहरी ताकतों की भूमिका को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि फिलहाल मंत्रालय के पास इस विषय पर कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने इस संबंध में किसी भी प्रकार की पुष्टि या टिप्पणी करने से इनकार किया।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि सीजेपी के आंदोलन को विदेशी स्रोतों से आर्थिक मदद मिल रही है। साथ ही कुछ पोस्ट में पाकिस्तान और खाड़ी देशों से संचालित सोशल मीडिया नेटवर्क तथा कथित टूलकिट के जरिए आंदोलन को बढ़ावा देने के आरोप भी लगाए गए। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस बीच, विदेशी फंडिंग के आरोपों की जांच की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई है। याचिका में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से मामले की जांच कराने की मांग की गई है। अदालत ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है, जबकि मामले की जांच को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
गौरतलब है कि नीट-यूजी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में सीजेपी के नेतृत्व में राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी है। इस आंदोलन के दौरान कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई है। वहीं, सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।





