Saturday, February 14, 2026

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सावधान! एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल पैदा कर रहा ‘साइलेंट पेंडेमिक’; स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेताया—‘5 राइट्स’ ही बचाएंगे जान

नई दिल्ली: पूरी दुनिया इस समय एक ऐसे अदृश्य खतरे का सामना कर रही है, जिसे स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ‘साइलेंट पेंडेमिक’ (Silent Pandemic) का नाम दिया है। यह खतरा है—एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानी AMR। साधारण भाषा में कहें तो, एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक और गलत इस्तेमाल के कारण अब बैक्टीरिया और वायरस इतने ताकतवर हो गए हैं कि उन पर दवाएं बेअसर हो रही हैं। यदि इसे समय रहते नहीं रोका गया, तो आने वाले समय में एक मामूली संक्रमण भी जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं के इस्तेमाल में ‘पांच राइट्स’ (5 Rights) के नियम को अपनाकर इस खतरे की रफ्तार को कम किया जा सकता है।

क्या है AMR और यह क्यों है खतरनाक?

एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) तब होता है जब सूक्ष्मजीव (जैसे बैक्टीरिया, वायरस, कवक और परजीवी) दवाओं के प्रभाव के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं।

  • दवाओं का बेअसर होना: जब हम बिना जरूरत या गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेते हैं, तो शरीर में मौजूद बैक्टीरिया खुद को बचाने के लिए अपना स्वरूप बदल लेते हैं। इसके बाद वही दवा उन पर काम करना बंद कर देती है।
  • बढ़ती मृत्यु दर: लैंसेट (Lancet) जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में हर साल लाखों लोग ऐसी बीमारियों से मर रहे हैं जिनका इलाज पहले संभव था, लेकिन अब उन पर दवाएं काम नहीं करतीं।

AMR को रोकने का अचूक मंत्र: ये हैं ‘5 राइट्स’

डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के अनुसार, एंटीबायोटिक के उपयोग के दौरान पांच बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है:

  1. राइट पेशेंट (Right Patient): एंटीबायोटिक केवल उसी मरीज को दी जानी चाहिए जिसे वास्तव में इसकी जरूरत हो। हर बुखार या जुकाम के लिए दवा लेना गलत है।
  2. राइट ड्रग (Right Drug): हर बीमारी के लिए अलग एंटीबायोटिक होती है। बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से या मेडिकल स्टोर से पूछकर कोई भी दवा न लें।
  3. राइट डोज (Right Dose): दवा की मात्रा कितनी होनी चाहिए, यह डॉक्टर ही तय करते हैं। कम या ज्यादा डोज लेना बैक्टीरिया को और ताकतवर बना देता है।
  4. राइट रूट (Right Route): दवा को किस तरह लेना है (गोली, इंजेक्शन या सिरप), इसका पालन करना जरूरी है।
  5. राइट टाइम (Right Time): दवा का कोर्स पूरा करना सबसे महत्वपूर्ण है। अक्सर लोग थोड़ा ठीक महसूस होने पर दवा बीच में छोड़ देते हैं, जिससे बचे हुए बैक्टीरिया दवा के प्रति रेजिस्टेंट हो जाते हैं।

बढ़ते खतरे के मुख्य कारण

  • सेल्फ मेडिकेशन: भारत जैसे देशों में बिना डॉक्टर के पर्चे के मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदना एक बड़ी समस्या है।
  • वायरल में एंटीबायोटिक: लोग अक्सर सर्दी-जुकाम (जो वायरल संक्रमण है) में भी एंटीबायोटिक ले लेते हैं, जबकि ये दवाएं केवल बैक्टीरियल संक्रमण पर काम करती हैं।
  • पशुपालन में उपयोग: मुर्गियों और मवेशियों की ग्रोथ बढ़ाने के लिए उन्हें एंटीबायोटिक दी जा रही है, जो मांस और दूध के जरिए इंसानी शरीर में पहुँच रही है।

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