महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने साधु ग्राम परियोजना को लेकर उठ रहे पर्यावरणीय मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने परियोजना के लिए हो रही पेड़ों की कटाई का खुलकर विरोध किया और कहा कि सरकार को इस विवाद को अनावश्यक रूप से आगे बढ़ने से रोकना चाहिए। ठाकरे के अनुसार, विकास कार्यों के नाम पर पर्यावरण के साथ समझौता करना किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं है।
राज ठाकरे ने कहा कि साधु ग्राम परियोजना को लेकर पहले से ही स्थानीय स्तर पर असंतोष और चिंताएं सामने आ रही हैं। ऐसे में पेड़ों के बड़े पैमाने पर कटान से माहौल और भी तनावपूर्ण हो सकता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह जनता की भावनाओं को समझते हुए इस योजना को पुनः विचाराधीन रखे और ऐसी कोई कार्रवाई न करे, जिससे पर्यावरण और समाज, दोनों को नुकसान पहुंचे।
मनसे प्रमुख ने यह भी कहा कि सरकारों का दायित्व केवल विकास कार्यों को आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि प्राकृतिक संसाधनों का संतुलन बना रहे। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि परियोजना आवश्यक समझी जाती है, तो पर्यावरण के अनुकूल विकल्प खोजे जाएं और ऐसे समाधान निकाले जाएं जो प्रकृति पर न्यूनतम प्रभाव डालें।
राज ठाकरे के बयान के बाद साधु ग्राम परियोजना को लेकर चल रही बहस एक बार फिर तेज हो गई है। पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों ने भी उनके बयान का समर्थन करते हुए कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि विवाद बढ़ने से पहले इस पर स्पष्ट रुख सामने आएगा।





