चेन्नई। आरएसएस की स्थापना के शताब्दी वर्ष को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। स्टालिन ने कहा कि “राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या सांप्रदायिक सोच का परिणाम थी और अब उसी विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए आरएसएस के सम्मान में स्मारक सिक्का जारी करना देश के लोकतांत्रिक मूल्यों पर चोट है।”
दरअसल, हाल ही में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शताब्दी वर्षगांठ को देखते हुए एक विशेष स्मारक सिक्का जारी करने की घोषणा की थी। विपक्षी दलों ने इस कदम का विरोध किया है। स्टालिन ने कहा कि गांधीजी ने जीवनभर सांप्रदायिक सौहार्द और धर्मनिरपेक्षता की वकालत की, जबकि उनकी हत्या ऐसे संगठन से जुड़े विचारों से प्रभावित व्यक्ति ने की थी। ऐसे में, आरएसएस को सरकारी सम्मान देना महात्मा गांधी की स्मृति का अपमान है।
स्टालिन ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने और विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा देने का काम कर रही है। उन्होंने कहा, “आजादी की लड़ाई में योगदान देने वालों को नजरअंदाज कर, सांप्रदायिक संगठनों को सम्मान देना लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष भारत की आत्मा के साथ विश्वासघात है।”
डीएमके नेता ने प्रधानमंत्री मोदी से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी गलत संदेश देगा।
गौरतलब है कि आरएसएस 2025 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है। संगठन के लिए स्मारक सिक्का जारी करने की घोषणा को लेकर दक्षिण भारत के कई विपक्षी दलों और गांधीवादी संगठनों ने आपत्ति जताई है।





