कीव/मॉस्को। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन ने एक बार फिर कम लागत वाले ड्रोन का इस्तेमाल कर रूस को भारी नुकसान पहुंचाया है। ताजा हमलों में रूसी ठिकानों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया, जिससे करोड़ों रुपये की क्षति हुई है। इस घटना ने न केवल रूस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की रणनीति पर भी दबाव बढ़ा दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेन ने घरेलू स्तर पर तैयार किए गए ऐसे ड्रोन का उपयोग किया, जिनकी लागत बेहद कम है, लेकिन उनका असर घातक साबित हुआ। इन ड्रोन हमलों से रूस के कई इलाकों में आगजनी और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि सस्ते ड्रोन युद्ध की तस्वीर बदल रहे हैं और यह “कम लागत, ज्यादा तबाही” की रणनीति साबित हो रही है।
रूस ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने कई ड्रोन मार गिराए, लेकिन स्वीकार किया कि कुछ ड्रोन लक्ष्यों तक पहुंचने में सफल रहे। इनसे तेल डिपो, गोदाम और कुछ सैन्य प्रतिष्ठानों में विस्फोट हुए। अनुमान है कि इस हमले में रूस को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यूक्रेन की यह रणनीति रूस की विशाल सैन्य ताकत के मुकाबले असमान युद्ध (Asymmetric Warfare) का हिस्सा है। यूक्रेन जहां कम लागत वाले संसाधनों से अधिकतम नुकसान पहुंचा रहा है, वहीं रूस को अपनी रक्षा प्रणाली और आर्थिक ढांचे पर भारी खर्च करना पड़ रहा है।
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इन ड्रोन हमलों की चर्चा तेज है। पश्चिमी देशों के विश्लेषक मानते हैं कि यूक्रेन ने यह साबित कर दिया है कि महंगे हथियारों से लैस दुश्मन को सस्ते साधनों से भी मात दी जा सकती है।





