इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई व्यापारिक नीतियों (Trade Policies) ने दक्षिण एशिया में एक नई कूटनीतिक बहस छेड़ दी है। ट्रंप प्रशासन ने ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत कई देशों पर भारी आयात शुल्क (Tariffs) लगाने की घोषणा की थी, लेकिन रणनीतिक साझेदारी का हवाला देते हुए भारत को इसमें विशेष रियायत प्रदान की है। भारत को मिली इस बड़ी छूट के बाद पड़ोसी देश पाकिस्तान में सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक नाराजगी और हताशा का माहौल है। पाकिस्तानी नागरिकों ने अपनी सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि अत्यधिक ‘चापलूसी’ और अमेरिकी इशारों पर नाचने के बाद भी उनके हाथ खाली हैं, जबकि भारत ने अपनी शर्तों पर सम्मान हासिल किया है।
ट्रंप का फैसला: भारत के लिए ‘नरम’ और बाकी दुनिया के लिए ‘सख्त’
राष्ट्रपति ट्रंप, जो आमतौर पर भारत की व्यापारिक दरों की आलोचना करते रहे हैं, उनके इस हृदय परिवर्तन के पीछे कई ठोस कारण माने जा रहे हैं:
- सामरिक रणनीतिक साझेदारी: अमेरिका भारत को चीन के खिलाफ एक मजबूत रक्षा और आर्थिक ढाल के रूप में देखता है।
- बड़ा बाजार: अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत एक विशाल बाजार है, जिसे ट्रंप प्रशासन खोना नहीं चाहता।
- मोदी-ट्रंप केमिस्ट्री: दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत तालमेल ने व्यापारिक वार्ताओं में ‘तनाव कम’ करने का काम किया है।
पाकिस्तान में आक्रोश: ‘सम्मान खरीदा नहीं जाता’
भारत को मिली इस ढील की खबर जैसे ही पाकिस्तान पहुंची, वहां की जनता और विशेषज्ञों ने अपनी ही सरकार को निशाने पर ले लिया:
- सरकार की विफलता: पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर लोग अपनी सरकार को कोस रहे हैं कि उन्होंने अमेरिका को खुश करने के लिए अपनी नीतियां गिरवी रख दीं, फिर भी ट्रंप ने उन्हें कोई राहत नहीं दी।
- भारत का उदाहरण: कई पाकिस्तानी विश्लेषकों ने ट्वीट किया कि “सम्मान खरीदा नहीं जाता, बल्कि कमाया जाता है।” उन्होंने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने झुकने के बजाय अपनी ताकत पर ढील हासिल की है।
- आर्थिक मार की चिंता: पाकिस्तान पहले से ही कर्ज और महंगाई से जूझ रहा है। अमेरिकी टैरिफ से उसे छूट न मिलना उसके निर्यात (Exports) के लिए एक और बड़ा झटका साबित होगा।
भारत के लिए इसके मायने क्या हैं?
ट्रंप प्रशासन द्वारा दी गई इस छूट से भारतीय उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी:
- निर्यात में बढ़ोतरी: स्टील, एल्युमीनियम और आईटी सेवाओं जैसे क्षेत्रों पर लगने वाले अतिरिक्त बोझ से भारतीय कंपनियों को सुरक्षा मिलेगी।
- वैश्विक साख: यह फैसला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती आर्थिक और कूटनीतिक शक्ति का प्रमाण है।
विशेषज्ञों की राय: ‘रियलिस्टिक’ विदेशी नीति
रक्षा और विदेशी मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप एक ‘लेन-देन’ (Transactional) वाले नेता हैं। भारत ने उन्हें यह विश्वास दिलाने में सफलता हासिल की है कि भारत के साथ व्यापारिक ढील देना अमेरिका के अपने हित में है। वहीं, पाकिस्तान के मामले में अमेरिका को अब कोई बड़ा आर्थिक या सुरक्षा लाभ नजर नहीं आ रहा है, यही वजह है कि उसे नजरअंदाज किया जा रहा है।
“यह खबर पाकिस्तान के लिए एक आईना है। जब तक आप आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं होते, दुनिया आपका सम्मान नहीं करेगी। भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को उस स्तर पर पहुँचा दिया है जहाँ उसे नजरअंदाज करना नामुमकिन है।” — एक वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार का बयान




