कोलकाता। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी इस बार स्वतंत्रता दिवस के सार्वजनिक आयोजनों से दूर रहीं। 15 अगस्त को उन्होंने कोलकाता में किसी सरकारी या सार्वजनिक समारोह में हिस्सा नहीं लिया। खास बात यह रही कि कालीघाट स्थित उनके आवास पर भी इस बार तिरंगा नहीं फहराया गया। सत्ता से बाहर होने के बाद स्वतंत्रता दिवस पर उनकी यह अनुपस्थिति राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।
पहली बार दिखी ऐसी दूरी
ममता बनर्जी लंबे समय तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री रहते हुए स्वतंत्रता दिवस के विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से शामिल होती रही हैं। हालांकि, 2026 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार और भाजपा के सत्ता में आने के बाद राज्य का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गया है। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी अब राज्य के मुख्यमंत्री हैं। ऐसे में इस बार ममता का स्वतंत्रता दिवस समारोहों से दूर रहना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कालीघाट आवास पर भी नहीं फहराया तिरंगा
जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, ममता बनर्जी ने अपने कालीघाट स्थित आवास पर भी ध्वजारोहण नहीं किया। इससे उनकी अनुपस्थिति को लेकर चर्चा और तेज हो गई। हालांकि, उनके इस फैसले की वजह को लेकर उनकी ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
चुनावी हार के बाद बदला राजनीतिक परिदृश्य
पश्चिम बंगाल में 15 वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद तृणमूल कांग्रेस को 2026 के विधानसभा चुनाव में बड़ा झटका लगा। भाजपा की जीत के साथ सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई सरकार बनी और ममता बनर्जी विपक्ष में पहुंच गईं। चुनाव परिणाम के बाद भी ममता ने इस्तीफा देने से इनकार किया था और राजनीतिक सक्रियता जारी रखने के संकेत दिए थे।
ऐसे समय में स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व के सार्वजनिक कार्यक्रमों से उनकी दूरी को बंगाल की बदली हुई राजनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, इस अनुपस्थिति को लेकर अंतिम राजनीतिक निष्कर्ष ममता बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस की ओर से स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट होगा।





