नई दिल्ली: भारत में लगातार बढ़ते सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक क्रांतिकारी तकनीक पेश की है। इस नई तकनीक के माध्यम से अब वाहन सड़क पर चलते हुए एक-दूसरे से ‘वायरलेस संवाद’ (V2V Communication) कर सकेंगे। यह तकनीक मानवीय चूक के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
क्या है ‘वाहन-से-वाहन’ (V2V) संचार तकनीक?
नितिन गडकरी द्वारा साझा की गई इस तकनीक को ‘व्हीकल-टू-व्हीकल’ (V2V) कम्युनिकेशन कहा जाता है। इसमें वाहनों में विशेष सेंसर और वायरलेस डिवाइस लगाए जाते हैं, जो एक निश्चित दायरे में चल रही अन्य गाड़ियों को सिग्नल भेजते हैं। यदि दो वाहन टकराने की स्थिति में होते हैं, तो यह तकनीक चालक को सचेत कर देती है या आपातकालीन स्थिति में ऑटोमैटिक ब्रेक लगा देती है।
कैसे काम करेगी यह तकनीक?
यह प्रणाली रेडियो फ्रीक्वेंसी और जीपीएस (GPS) डेटा का उपयोग करके काम करती है। इसके कार्य करने की प्रक्रिया को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
- डेटा शेयरिंग: सड़क पर चल रहे वाहन अपनी गति, दिशा और सटीक स्थिति का डेटा लगातार आसपास के अन्य वाहनों को भेजते रहते हैं।
- अंधे मोड़ पर सुरक्षा: यदि किसी अंधे मोड़ (Blind Spot) पर सामने से कोई वाहन आ रहा है जो चालक को दिखाई नहीं दे रहा, तो यह डिवाइस अलार्म बजाकर या डैशबोर्ड पर अलर्ट देकर सावधान कर देगा।
- चेतावनी सिग्नल: यदि आगे चल रही गाड़ी अचानक ब्रेक लगाती है, तो पीछे चल रही गाड़ी को तुरंत सिग्नल मिल जाएगा, जिससे ‘चेन एक्सीडेंट’ की संभावना खत्म हो जाएगी।
हादसों में आएगी भारी कमी
केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत में हर साल लाखों लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तकनीक के लागू होने से विशेष रूप से कोहरे (Fog) के दौरान और रात के समय होने वाले हादसों में 70 से 80 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है। यह तकनीक न केवल निजी कारों, बल्कि ट्रकों और बसों जैसे भारी वाहनों के लिए भी अनिवार्य की जा सकती है।
स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ता भारत
सरकार केवल वाहनों को ही नहीं, बल्कि सड़कों को भी स्मार्ट बनाने पर काम कर रही है। इसमें ‘व्हीकल-टू-इंफ्रास्ट्रक्चर’ (V2I) तकनीक पर भी काम चल रहा है, जहाँ सड़क पर लगे ट्रैफिक सिग्नल और साइन बोर्ड सीधे वाहन के कंप्यूटर से बात करेंगे। इससे ओवरस्पीडिंग और रेड लाइट जंप करने जैसी घटनाओं पर स्वतः लगाम लग सकेगी।





