नई दिल्ली: संसद के निचले सदन, लोकसभा में आज नक्सलवाद की गंभीर समस्या पर नियम 193 के तहत अल्पकालिक चर्चा चल रही है। बहस के दौरान पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और वैचारिक मतभेद देखने को मिल रहे हैं। कुछ ही देर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह देश के सामने नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाइयों और उपलब्धियों का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड रखने वाले हैं, जिसे लेकर सदन में भारी उत्सुकता है। गृह मंत्री के बयान से पहले, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने चर्चा में भाग लेते हुए नक्सलवाद को लेकर सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए।
ओवैसी का तीखा हमला: “नक्सलवाद केवल सैन्य कार्रवाई का मामला नहीं”
लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने कहा कि इस समस्या को सिर्फ सैन्य कार्रवाई (Military Action) के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। उन्होंने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह 90 प्रतिशत सैन्य कार्रवाई का मामला है, जबकि विचारधारा अब भी कायम है। ओवैसी ने विस्तार से बताया कि सीपीआई (एमएल) (CPI(ML)) ने 1974 से 1977 तक आपातकाल के दौरान आंदोलन रोका था, लेकिन बाद में उन्होंने फिर से हथियार उठा लिए। इसका मतलब है कि केवल बल प्रयोग से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
नेपाल और बांग्लादेश का उदाहरण: शासन प्रणाली बदलने के लिए युवाओं का आंदोलन
ओवैसी ने नेपाल और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां युवाओं ने शासन प्रणाली बदलने के लिए आंदोलन किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि नक्सलवाद की जड़ें सामाजिक-आर्थिक असमानता, विकास की कमी और आदिवासियों व वंचितों के अधिकारों के हनन में हैं। इन मूलभूत समस्याओं का समाधान किए बिना, केवल सैन्य कार्रवाई से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर पैदा करने पर ध्यान केंद्रित करें, न कि केवल बल प्रयोग पर।
गृह मंत्री अमित शाह का रिपोर्ट कार्ड: नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की उपलब्धियाँ
गृह मंत्री अमित शाह जल्द ही सदन के सामने नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाइयों और उपलब्धियों का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड रखने वाले हैं। उम्मीद है कि वे बताएंगे कि पिछले कुछ वर्षों में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या में कितनी कमी आई है, कितने नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, और कितने नक्सली मारे गए हैं। साथ ही, वे बताएंगे कि सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास के लिए क्या-क्या कदम उठाए हैं, जैसे कि सड़कें, स्कूल, अस्पताल और बिजली की सुविधा प्रदान करना। गृह मंत्री का बयान नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की नीतियों और रणनीतियों को स्पष्ट करेगा और इस मुद्दे पर चल रही बहस को एक नई दिशा देगा।
इस समय सदन में माहौल काफी तनावपूर्ण है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ नक्सलवाद के मुद्दे पर बहस कर रहे हैं। गृह मंत्री के बयान के बाद, इस मुद्दे पर और अधिक बहस होने की संभावना है।





