न्यूयॉर्क:
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में शुक्रवार को अमेरिका और वेनेजुएला के प्रतिनिधियों के बीच उस समय जोरदार बहस हो गई, जब ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला में लोकतंत्र बहाली और मानवाधिकार उल्लंघन के मुद्दे को परिषद के एजेंडे में शामिल करने की मांग की। बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
अमेरिका ने इस दौरान स्पष्ट कहा कि वह वेनेजुएला में तानाशाही और लोकतंत्र के दमन के खिलाफ अपनी आवाज उठाता रहेगा और किसी भी दबाव में पीछे नहीं हटेगा। अमेरिकी प्रतिनिधि ने कहा कि ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला की जनता के साथ खड़ा है और वहां की सरकार के “अलोकतांत्रिक व्यवहार” को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उजागर करता रहेगा।
अमेरिकी प्रतिनिधि का बयान: “हम पीछे नहीं हटने वाले हैं। जब तक वेनेजुएला के लोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के माध्यम से अपनी सरकार नहीं चुन लेते, अमेरिका अपनी भूमिका निभाता रहेगा।”
वेनेजुएला ने लगाया हस्तक्षेप का आरोप
वहीं, वेनेजुएला के प्रतिनिधि ने अमेरिका पर उसके आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों और राजनीतिक दबाव के जरिए वेनेजुएला की सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है।
“अमेरिका का उद्देश्य लोकतंत्र नहीं, बल्कि हमारे संसाधनों पर नियंत्रण पाना है,” वेनेजुएला के प्रतिनिधि ने कहा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है और लाखों लोगों को गरीबी का सामना करना पड़ रहा है।
मानवाधिकार और लोकतंत्र पर अमेरिका का जोर
अमेरिका ने जवाब में कहा कि वेनेजुएला में मौजूदा शासन ने मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन किया है और विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार बढ़ाए हैं। ट्रंप प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वह वेनेजुएला में राजनीतिक स्वतंत्रता, प्रेस की आजादी और न्यायिक सुधारों के लिए कदम उठाए।
अमेरिकी प्रतिनिधि ने कहा,
“वेनेजुएला की जनता आवाज उठाने से नहीं डर रही, और अमेरिका इस आवाज को वैश्विक स्तर पर समर्थन देता रहेगा।”
परिषद में विभाजन की स्थिति
बैठक के दौरान कई देशों ने इस मुद्दे पर अलग-अलग रुख अपनाया। रूस और चीन ने अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि किसी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। वहीं, फ्रांस और ब्रिटेन ने मानवाधिकार हनन के मामलों पर चिंता जताई और संयुक्त राष्ट्र से निगरानी बढ़ाने की मांग की।
पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि अमेरिका लंबे समय से वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के शासन का विरोध करता रहा है। ट्रंप प्रशासन ने मादुरो की सरकार को “तानाशाही” करार देते हुए विपक्षी नेता जुआन गुएडो को देश का वैध राष्ट्रपति माना था।
दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध 2019 से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं।
विश्लेषण
राजनयिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह बहस न केवल अमेरिका और वेनेजुएला के बीच टकराव को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि संयुक्त राष्ट्र में लोकतंत्र बनाम संप्रभुता का मुद्दा लगातार गहराता जा रहा है।
संभावना है कि आने वाले महीनों में यह मामला संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद बन सकता है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका और वेनेजुएला आमने-सामने, तीखी बहस के बीच ट्रंप प्रशासन का दोटूक बयान — “हम पीछे नहीं हटेंगे”





