न्यूयॉर्क/नई दिल्ली। वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक शक्ति और बढ़ते प्रभाव पर एक बार फिर मुहर लगी है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) के चुनावों में भारत ने शानदार सफलता हासिल करते हुए चार महत्वपूर्ण निकायों में निर्विरोध जीत दर्ज की है। इन सभी चुनावों में भारत का चयन सर्वसम्मति से होना इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक समुदाय सतत विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मुद्दों पर भारत के नेतृत्व और अनुभव पर गहरा भरोसा करता है।
इन चार प्रमुख निकायों में भारत निभाएगा बड़ी भूमिका
भारत को उन समितियों में स्थान मिला है जो संयुक्त राष्ट्र के नीति-निर्माण और वैश्विक मानकों को तय करने में केंद्रीय भूमिका निभाती हैं:
- विकास के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आयोग (CSTD): यह निकाय सतत भविष्य के लिए तकनीकी नवाचारों और डिजिटल विकास की दिशा तय करता है।
- गैर-सरकारी संगठनों (NGO) की समिति: यह समिति संयुक्त राष्ट्र की गतिविधियों में सिविल सोसाइटी संगठनों की भागीदारी और उनकी पात्रता का निर्धारण करती है।
- कार्यक्रम एवं समन्वय समिति (CPC): यह निकाय संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों के बजट, योजना और उनके कामकाज के बीच तालमेल सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी है।
- आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की समिति (CESCR): भारत की वरिष्ठ राजनयिक प्रीति सरन को इस प्रतिष्ठित समिति में पुनः निर्वाचित किया गया है।
प्रीति सरन का पुनः निर्वाचन: भारत के अनुभव का सम्मान
वरिष्ठ राजनयिक प्रीति सरन का CESCR में फिर से चुना जाना भारत के लिए विशेष गौरव की बात है।
- शानदार करियर: सरन के पास 36 वर्षों का लंबा कूटनीतिक अनुभव है। वे वियतनाम में भारत की राजदूत रह चुकी हैं और मॉस्को, जेनेवा, ढाका व काहिरा जैसे महत्वपूर्ण मिशनों में सेवा दे चुकी हैं।
- समिति की भूमिका: CESCR के 18 विशेषज्ञों का दल भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और पानी जैसे बुनियादी मानवाधिकारों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों के पालन की निगरानी करता है। प्रीति सरन इससे पहले इस समिति के सत्र की अध्यक्षता भी कर चुकी हैं।
क्या है ECOSOC और इसकी महत्ता?
आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) संयुक्त राष्ट्र की उन छह प्रमुख शाखाओं में से एक है, जो सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए काम करती है।
- तीन आयामों पर जोर: यह परिषद आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों के बीच संतुलन बनाकर वैश्विक नीतियों का समन्वय करती है।
भारत का प्रभाव: इन निकायों में भारत की उपस्थिति से अब वैश्विक नीतियों में ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की आवाज अधिक मजबूती से गूंजेगी। भारत विशेष रूप से डिजिटल तकनीक और सामाजिक सुरक्षा के अपने सफल मॉडलों को विश्व के साथ साझा कर सकेगा।





