न्यूयॉर्क/नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई और उसे मानवाधिकार उल्लंघनों में सबसे खराब रिकॉर्ड रखने वाला देश करार दिया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और अपने ही नागरिकों के बुनियादी अधिकारों को कुचलने का गंभीर आरोप लगाया।
भारत की ओर से कहा गया कि पाकिस्तान बार-बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर झूठ फैलाकर दूसरों पर उंगली उठाने की कोशिश करता है, जबकि हकीकत यह है कि वह खुद मानवाधिकार उल्लंघनों का अड्डा बना हुआ है। भारतीय राजनयिक ने महासभा में कहा कि “पाकिस्तान के पास न तो लोकतांत्रिक परंपरा है, न ही अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का इरादा। वहां बलूचिस्तान से लेकर खैबर पख्तूनख्वा तक नागरिकों को उनके अधिकारों से वंचित किया जाता है और विरोध की हर आवाज को दबा दिया जाता है।”
भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाकर वैश्विक समुदाय को गुमराह करने की कोशिश करता है, जबकि सच यह है कि आतंकवाद को पनाह देने और उसे सीमा पार भेजने में सबसे बड़ा दोषी वही है। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान का असली चेहरा दुनिया के सामने आ चुका है और अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर कठोर रुख अपनाना चाहिए।
भारतीय राजनयिकों ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति का जिक्र करते हुए बताया कि वहां हिंदू, सिख, ईसाई और शिया समुदाय लगातार हमलों और भेदभाव का शिकार हैं। जबरन धर्मांतरण, अल्पसंख्यक महिलाओं के अपहरण और धार्मिक स्थलों पर हमले पाकिस्तान की कट्टरपंथी सोच को दर्शाते हैं।
भारत ने महासभा में दो टूक कहा कि पाकिस्तान की सरकार और संस्थान अपने नागरिकों को न्याय देने में पूरी तरह विफल रहे हैं। इस स्थिति में उसे मानवाधिकारों के मुद्दे पर किसी भी देश पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान ने एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाने की कोशिश की थी, जिसके जवाब में भारत ने दृढ़ रुख अपनाते हुए उसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने बेनकाब कर दिया।





