ISS पर 18 दिन बिताने के बाद ‘स्प्लैशडाउन’ से होगी सुरक्षित वापसी, गगनयान मिशन के लिए बड़ी उपलब्धि
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला 15 जुलाई को पृथ्वी पर लौटने वाले हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर एक्सिओम-4 मिशन के तहत 18 दिन बिताए हैं। इस मिशन में उनके साथ तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री — मिशन कमांडर पैगी व्हिटसन, पोलैंड के स्लावोज उज्नान्स्की-विस्नीव्स्की और हंगरी के टिबोर कापू — शामिल हैं।
‘स्प्लैशडाउन’ लैंडिंग से होगी वापसी
नासा के अनुसार, चारों अंतरिक्ष यात्री 14 जुलाई को भारतीय समयानुसार दोपहर 4:35 बजे स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन यान में सवार होकर ISS से रवाना होंगे और 15 जुलाई को दोपहर 3:00 बजे कैलिफोर्निया तट के पास समुद्र में सुरक्षित ‘स्प्लैशडाउन’ करेंगे। यह प्रक्रिया अंतरिक्ष से पृथ्वी पर लौटने का मानक और सुरक्षित तरीका है।
मिशन से पहले की तैयारियां
अंडॉकिंग से पूर्व सभी अंतरिक्ष यात्रियों को अपने स्पेससूट पहनने होंगे और यान में बैठकर विभिन्न सुरक्षा परीक्षणों को पूरा करना होगा। स्पेसक्राफ्ट की गति 28,000 किलोमीटर प्रति घंटा होती है, जो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश से पहले धीरे-धीरे कम की जाती है।
550 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण अनुभव
इस मिशन पर भारत ने लगभग ₹550 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह अनुभव वर्ष 2027 में प्रस्तावित ‘गगनयान’ मिशन की नींव को और मजबूत बनाएगा। ISRO ने बताया कि शुभांशु शुक्ला का स्वास्थ्य पूरी तरह से ठीक है और वह अत्यधिक उत्साहित हैं। पृथ्वी पर लौटने के बाद वह सात दिन फ्लाइट सर्जन की निगरानी में पुनर्वास कार्यक्रम में रहेंगे, जहां उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति पर ध्यान दिया जाएगा।
ISS से विज्ञान के लिए वापसी
ड्रैगन यान न केवल अंतरिक्ष यात्रियों को वापस ला रहा है, बल्कि नासा हार्डवेयर, 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोगों का डाटा और लगभग 263 किलोग्राम सामग्री भी पृथ्वी पर ला रहा है।
मिशन के अनौपचारिक पल
मिशन कमांडर पैगी व्हिटसन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मिशन के अंतिम दिन टीम ने ISS पर खास पलों का आनंद लिया। उन्होंने मजाक में कहा कि शुभांशु शुक्ला का लाया गाजर का हलवा और आमरस सबका दिल जीत गया।
भारत के लिए गौरव का क्षण
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि ड्रैगन यान 14 जुलाई को ISS से अलग होगा और 15 जुलाई को ‘स्प्लैशडाउन’ के जरिए पृथ्वी पर पहुंचेगा। मंत्री ने इसे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए मील का पत्थर बताया।
इस मिशन के सफल समापन के साथ भारत न केवल मानव अंतरिक्ष यान अभियानों में अपनी क्षमताओं को और परख रहा है, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष सहयोग में भी मजबूती से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है।





