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शिवसेना विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई शुरू, शिंदे और ठाकरे गुट की दलीलों पर नजर

नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े बहुचर्चित शिवसेना विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई शुरू हो गई है। इस मामले में अदालत शिवसेना के नाम, चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ और पार्टी पर अधिकार को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इस सुनवाई को राज्य की राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह विवाद वर्ष 2022 में शिवसेना में हुए विभाजन के बाद सामने आया था। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में विधायकों के एक समूह ने तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से अलग होकर नई सरकार बनाई थी। इसके बाद पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों के बीच कानूनी लड़ाई शुरू हुई।

उद्धव ठाकरे गुट ने निर्वाचन आयोग के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना मानते हुए पार्टी का नाम और ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न सौंपा गया था। इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को भी चुनौती दी गई है, जिसमें शिंदे गुट के विधायकों की अयोग्यता से जुड़ा निर्णय दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में दोनों पक्षों के वकील अपने-अपने तर्क पेश कर रहे हैं। ठाकरे गुट का कहना है कि पार्टी की मूल पहचान और संगठनात्मक अधिकारों की अनदेखी की गई, जबकि शिंदे गुट अपने पक्ष में विधायकों के बहुमत और संवैधानिक प्रक्रियाओं का हवाला दे रहा है।

इस मामले का फैसला महाराष्ट्र की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। अदालत का निर्णय यह तय करेगा कि शिवसेना की आधिकारिक पहचान और चुनावी विरासत पर अंतिम अधिकार किस गुट का रहेगा। राजनीतिक दलों और नेताओं की नजरें अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं।

सुप्रीम कोर्ट में लंबित इस मामले को राज्य में पार्टी विभाजन, विधायकों की भूमिका और चुनावी राजनीति से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक सवालों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

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