टोक्यो: जापान के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की हत्या के मामले में एक स्थानीय अदालत ने मुख्य आरोपी तेत्सुया यामागामी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जुलाई 2022 में एक चुनावी सभा के दौरान यामागामी ने घर में बनी (होममेड) बंदूक से आबे पर पीछे से हमला किया था, जिसमें उनकी गर्दन पर घातक गोली लगी थी। इस हमले ने न केवल जापान बल्कि पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था। लंबी कानूनी प्रक्रिया और मानसिक जांच के बाद, अदालत ने माना कि यामागामी का कृत्य पूर्व-नियोजित और लोकतंत्र पर हमला था। हालांकि अभियोजन पक्ष ने इसे दुर्लभ मामला बताया था, लेकिन अदालत ने उसे मौत की सजा के बजाय जीवन भर जेल में रखने का आदेश दिया है।
वारदात का वो काला दिन: क्या हुआ था 8 जुलाई 2022 को?
जापान के नारा शहर में हुई उस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी थी:
- चुनावी सभा में हमला: शिंजो आबे नारा शहर की सड़क पर एक छोटे से मंच से भाषण दे रहे थे। यामागामी भीड़ में सामान्य व्यक्ति की तरह घुसा और आबे के बिल्कुल करीब पहुँच गया।
- घातक हथियार: आरोपी ने लकड़ी और पाइप की मदद से खुद एक दोनाली बंदूक तैयार की थी। उसने बेहद करीब से दो राउंड फायर किए, जिसमें दूसरी गोली आबे की गर्दन के पास लगी।
- मौके पर गिरफ्तारी: गोली चलने के तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों ने यामागामी को दबोच लिया था। शिंजो आबे को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अत्यधिक खून बह जाने के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।
हत्या के पीछे की वजह: ‘यूनिफिकेशन चर्च’ से जुड़ा विवाद
जांच के दौरान यामागामी ने अपनी नाराजगी का एक चौंकाने वाला कारण बताया था:
- पारिवारिक बर्बादी का आरोप: आरोपी का दावा था कि उसकी मां ने ‘यूनिफिकेशन चर्च’ (एक धार्मिक समूह) को भारी मात्रा में दान दिया था, जिससे उसका परिवार कंगाल हो गया।
- आबे को ठहराया जिम्मेदार: यामागामी का मानना था कि शिंजो आबे और उनके परिवार ने इस चर्च को जापान में बढ़ावा दिया है, इसलिए उसने बदला लेने के लिए आबे को निशाना बनाया।
- मानसिक जांच: मुकदमे के दौरान आरोपी की मानसिक स्थिति की लंबी जांच की गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह सजा पाने के योग्य है या नहीं। रिपोर्ट में उसे पूरी तरह फिट पाया गया।
जापान की राजनीति और सुरक्षा पर प्रभाव
इस हत्या के बाद जापान में कई बड़े बदलाव देखने को मिले:
- सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव: जापान के पुलिस प्रमुख ने सुरक्षा में चूक की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया था। अब वहां के वीवीआईपी (VVIP) सुरक्षा घेरे को पूरी तरह बदल दिया गया है।
- धार्मिक समूहों पर लगाम: इस घटना के बाद जापान सरकार ने धार्मिक संगठनों के चंदे और उनकी गतिविधियों की जांच के लिए नए कानून पारित किए हैं।
- शिंजो आबे की विरासत: आबे को एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने ‘एबेनॉमिक्स’ और ‘क्वाड (QUAD)’ जैसे मंचों के जरिए जापान को वैश्विक राजनीति में नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया।
निष्कर्ष: न्याय की जीत या अधूरी सजा?
अदालत के इस फैसले पर जापान में मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ लोग इस जघन्य अपराध के लिए मृत्युदंड की मांग कर रहे थे, जबकि मानवाधिकार समर्थकों ने उम्रकैद के फैसले का स्वागत किया है। यह फैसला संदेश देता है कि हिंसा के जरिए राजनीतिक विरोध जताने वालों के लिए कानून में कोई जगह नहीं है। यामागामी अब अपनी पूरी जिंदगी जेल में ही काटेगा, जहाँ उसे अपनी इस खौफनाक करतूत पर पछतावा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।





