Wednesday, March 4, 2026

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वोट चोरी के आरोप, लेकिन नाम जोड़ने-कटवाने चुनाव आयोग नहीं पहुंची कोई पार्टी

अररिया/पटना। विपक्षी दल कांग्रेस और राजद जहां प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग के आंकड़े इन दावों को कमजोर करते दिख रहे हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब तक किसी भी बड़ी राजनीतिक पार्टी ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने या कटवाने को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है।
राहुल-तेजस्वी का आरोप
राहुल गांधी और तेजस्वी यादव 24 अगस्त को ‘वोट अधिकार यात्रा’ के तहत अररिया पहुंचे। इस दौरान भारी भीड़ के बीच दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग पर जनता का वोट चुराने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा की तरह बिहार में भी वोट चोरी की साजिश हो रही है, लेकिन वे इसे कामयाब नहीं होने देंगे। उन्होंने दावा किया कि कई मतदाताओं का नाम सूची से मृत दिखाकर काट दिया गया है।

चुनाव आयोग का जवाब
राहुल-तेजस्वी के आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने रविवार को एक सूचना जारी कर कहा कि अब तक किसी भी राजनीतिक दल ने मतदाता सूची में नाम जुड़ने या हटाए जाने को लेकर संपर्क नहीं किया है। केवल सीपीआई (माले-लिबरेशन) ने दस नामों पर आपत्ति दर्ज कराई है। वहीं, निजी तौर पर 1.21 लाख से अधिक लोगों ने संशोधन के लिए आवेदन दिए हैं। आयोग ने यह भी बताया कि मतदाता सूची में सुधार की अंतिम समय सीमा एक सप्ताह में समाप्त हो रही है।

बीएलए की सक्रियता पर सवाल
विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण में विपक्षी दलों के हजारों बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) तैनात हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, राजद के 47,506 और कांग्रेस के 17,549 बीएलए काम कर रहे हैं। वाम दलों के भी करीब 2,400 बीएलए सक्रिय बताए गए हैं। इसके बावजूद किसी बीएलए ने अब तक नाम जोड़ने या कटवाने के लिए पहल नहीं की है।
विपक्ष की दलील
तेजस्वी यादव ने कहा कि नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया बेहद लंबी है, इस कारण बीएलए औपचारिक शिकायत नहीं कर पा रहे हैं। राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोहराया कि चुनाव आयोग पक्षपात कर रहा है और विपक्षी दलों की बातों को नज़रअंदाज़ कर रहा है।

भाजपा का पलटवार
भाजपा नेता जयराम विप्लव ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि “चुनाव आयोग साफ कर चुका है कि केवल मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। इसमें कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है। विपक्ष जानता है कि वोट चोरी का आरोप सिर्फ मतदाताओं को गुमराह करने और राजनीतिक लाभ लेने के लिए लगाया जा रहा है। यही कारण है कि इतनी बड़ी संख्या में बीएलए होने के बावजूद एक भी औपचारिक शिकायत नहीं की गई।”
भाजपा ने कहा कि विपक्ष का पूरा अभियान ‘झूठ और भ्रम फैलाने’ पर आधारित है, क्योंकि यदि वास्तव में गड़बड़ी होती तो सबसे पहले उनके बीएलए ही चुनाव आयोग से संपर्क करते।

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