जामनगर। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो बुधवार को गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में वेनेजुएला के कच्चे तेल के प्रसंस्करण और ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होने की उम्मीद है। अमेरिका चाहता है कि रिलायंस अपनी रिफाइनरियों में वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल को अधिक मात्रा में प्रोसेस करे। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अनिश्चितता के बीच इस मुलाकात को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रुबियो भारत की यात्रा पर हैं। उन्होंने मंगलवार को मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, रक्षा और तकनीकी सहयोग सहित कई मुद्दों पर चर्चा की थी। इसके बाद उनका जामनगर स्थित रिलायंस के विशाल रिफाइनिंग परिसर का दौरा करने का कार्यक्रम है। वह वंतारा केंद्र में मुकेश अंबानी के साथ रात्रिभोज भी करेंगे।
भारत को बताया रिफाइनिंग सुपरपावर
मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रुबियो ने भारत को ‘रिफाइनिंग सुपरपावर’ बताया। उन्होंने कहा कि रिलायंस पहले भी वेनेजुएला के कच्चे तेल को प्रोसेस कर चुकी है और उसके पास भारी कच्चे तेल को रिफाइन करने की पर्याप्त क्षमता है। वेनेजुएला से तेल की उपलब्धता बढ़ने पर भारतीय कंपनी इसकी प्रोसेसिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अमेरिका वेनेजुएला के तेल उत्पादन में वृद्धि के साथ उसके लिए नए बाजार तलाश रहा है। रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी इस लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां भारी और उच्च सल्फर वाले कच्चे तेल को प्रोसेस करने की विशेष क्षमता मौजूद है।
रूसी तेल पर निर्भरता घटाने की कोशिश
अमेरिका भारत को ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। भारत लंबे समय से रूस सहित विभिन्न देशों से कच्चा तेल खरीदता रहा है। अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि भारत अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों और अन्य वैकल्पिक स्रोतों से भी अधिक आपूर्ति हासिल करे।
रुबियो ने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में बदलाव एक दिन में संभव नहीं है, लेकिन भारत इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा को दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
बड़ी ऊर्जा साझेदारी की संभावना
रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग परिसरों में शामिल है। ऐसे में वेनेजुएला के तेल की अधिक प्रोसेसिंग और संभावित निवेश को लेकर होने वाली बातचीत भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग को नई दिशा दे सकती है। हालांकि, फिलहाल किसी नए तेल समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।





