नई दिल्ली। भाजपा के वरिष्ठ नेता और संगठनकर्ता वीरेंद्र सचदेवा ने पटाखों पर लगी प्रतिबंध की नीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देशभर में दीवाली और अन्य त्योहारों के दौरान पटाखों पर रोक लगाना वामपंथी विचारधारा का प्रयास है, जो परंपरागत हिंदू उत्सवों की भावना को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है।
सचदेवा ने कहा कि यह कदम धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ है। उनका दावा है कि वामपंथी समूह “लोकप्रिय त्योहारों को कम महत्व देने और लोगों को मनोवैज्ञानिक रूप से सीमित करने” की रणनीति के तहत ऐसे प्रतिबंध लगा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पटाखों और परंपरागत उत्सवों के माध्यम से संस्कृति और परंपरा की जीवंतता बनी रहती है।
इसके साथ ही सचदेवा ने सरकार की भूमिका की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि वर्तमान “सनातन प्रेमी सरकार” ने जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए पटाखों की बिक्री और उपयोग की अनुमति दी है। उन्होंने सरकार के इस निर्णय को त्योहारों के दौरान लोगों को सांस्कृतिक और धार्मिक स्वतंत्रता देने वाला कदम बताया।
सचदेवा ने कहा कि लोगों को चेतावनी दी जानी चाहिए कि त्योहारों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के परंपरागत स्वरूप में किसी भी तरह का हस्तक्षेप या प्रतिबंध अस्वीकार्य है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे नियमों को लागू करते समय जनता की भावनाओं का सम्मान करें और सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हुए उत्सवों की अनुमति दें।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, पटाखों और त्योहारी गतिविधियों को लेकर यह बयान सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टिकोण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास दिखाता है। इस प्रकार की टिप्पणियों से आम जनता में त्योहारों के प्रति उत्साह और परंपरा के प्रति सम्मान बढ़ाने की दिशा में संदेश भी जाता है।
सचदेवा के बयान के बाद पटाखा उद्योग और व्यापार संगठन भी सरकार के फैसले की सराहना कर रहे हैं, क्योंकि इससे त्योहारों के दौरान व्यापार में गतिशीलता बनी रहेगी और रोजगार प्रभावित नहीं होंगे।





