नई दिल्ली/ब्यूरो: भारत की सांस्कृतिक धरोहरों और ऐतिहासिक स्मारकों के बेहतर संरक्षण के लिए केंद्र सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब देश की चुनिंदा ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण और वहां पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल को अपनाया जाएगा। इस योजना के तहत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) निजी कंपनियों और संस्थाओं को स्मारकों के रखरखाव, सौंदर्यीकरण और वहां नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का मौका देगा। सरकार का उद्देश्य स्मारकों को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करना और उनके ऐतिहासिक महत्व को सुरक्षित रखना है।
क्या है पीपीपी मॉडल की कार्ययोजना?
सरकार की ‘अडॉप्ट ए हेरिटेज’ (Adopt a Heritage) योजना के इस नए स्वरूप के तहत निजी कंपनियों को विशिष्ट जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी:
- रखरखाव और सुविधाएं: निजी कंपनियां स्मारकों के आसपास साफ-सफाई, पीने के पानी, बेहतर शौचालय, कैफेटेरिया और रास्तों का विकास करेंगी।
- डिजिटल अनुभव: स्मारकों के इतिहास को समझाने के लिए आधुनिक तकनीक जैसे ऑगमेंटेड रियलिटी (AR), लाइट एंड साउंड शो और डिजिटल गाइड की व्यवस्था की जाएगी।
- संरक्षण कार्य: एएसआई की देखरेख में विशेषज्ञ निजी एजेंसियां इमारतों के स्ट्रक्चरल संरक्षण (Structural Conservation) में भी मदद कर सकेंगी।
निजी क्षेत्र को शामिल करने के मुख्य कारण
- संसाधनों की कमी को पूरा करना: एएसआई के पास 3,600 से अधिक स्मारक हैं। इतने बड़े स्तर पर रखरखाव के लिए धन और आधुनिक मैनपावर की आवश्यकता को निजी निवेश के जरिए पूरा किया जाएगा।
- पर्यटन को बढ़ावा: निजी क्षेत्र के आने से स्मारकों पर पर्यटकों का अनुभव बेहतर होगा, जिससे घरेलू और विदेशी पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा।
- रोजगार के अवसर: इन स्मारकों के आसपास स्थानीय हस्तशिल्प और गाइड सेवाओं के विकसित होने से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।
विवाद और सुरक्षा पर सरकार का स्पष्टीकरण
विपक्ष और कुछ विशेषज्ञों द्वारा उठाए गए सवालों पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि:
- मालिकाना हक एएसआई का ही रहेगा: पीपीपी मॉडल का मतलब स्मारकों को बेचना नहीं है। मालिकाना हक और कड़े नियम एएसआई के पास ही रहेंगे।
- कठोर शर्तें: किसी भी निजी कंपनी को स्मारक के मूल ढांचे से छेड़छाड़ करने की अनुमति नहीं होगी। हर काम एएसआई के पुरातत्व विशेषज्ञों की सीधी निगरानी में होगा।
- सीएसआर (CSR) फंड का उपयोग: कंपनियां अपने ‘कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी’ फंड का इस्तेमाल इन विरासत स्थलों के संरक्षण में कर सकेंगी।
भविष्य की राह: पायलट प्रोजेक्ट की तैयारी
शुरुआती चरण में देश के कुछ प्रमुख और कम चर्चित स्मारकों को इस मॉडल के लिए चुना गया है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे देश भर के अन्य एएसआई संरक्षित स्थलों पर भी लागू किया जाएगा।
निष्कर्ष: विरासत और आधुनिकता का संगम
विशेषज्ञों का मानना है कि पीपीपी मॉडल भारत की ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह न केवल हमारी विरासतों को नई जिंदगी देगा, बल्कि उन्हें आधुनिक दुनिया की जरूरतों के अनुसार आकर्षक भी बनाएगा।





