सुप्रीम कोर्ट ने देश में अपराध करने वाले विदेशी नागरिकों के जमानत पर छूटने के बाद फरार होने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार से इस संबंध में एक ठोस नीति बनाने पर विचार करने को कहा है। अदालत ने कहा कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे कोई भी विदेशी नागरिक जमानत का दुरुपयोग कर न्याय से बचकर न निकल सके।
मामला नाइजीरियाई नागरिक एलेक्स डेविड से जुड़ा है, जिस पर धोखाधड़ी और आईटी एक्ट सहित कई धाराओं में मामला दर्ज था। झारखंड हाईकोर्ट ने मई 2022 में उसे जमानत दी थी, लेकिन बाद में वह फरार हो गया। राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। शीर्ष अदालत ने पिछले साल 4 दिसंबर को हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर जमानत निरस्त कर दी थी।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि भारत और नाइजीरिया के बीच कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है। ऐसे में अपराधी को भारत वापस लाना मुश्किल है। अदालत ने केंद्र को सुझाव दिया कि वह या तो नई नीति बनाए या मौजूदा दिशानिर्देशों के तहत उचित कदम उठाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके।
केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि विदेशों से जुड़े आपराधिक मामलों में जांच, पारस्परिक कानूनी सहायता और नोटिस/न्यायिक दस्तावेजों की तामील जैसी प्रक्रियाओं के लिए दिशानिर्देश मौजूद हैं। हालांकि, प्रत्यर्पण संधि न होने के कारण नाइजीरियाई अधिकारियों से सहयोग मिलना चुनौतीपूर्ण है।





