नई दिल्ली: शेयर बाजार के वायदा एवं विकल्प खंड (F&O) में छोटे निवेशकों द्वारा की जा रही अंधाधुंध सट्टेबाजी और उसमें होने वाले भारी नुकसान को देखते हुए केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है। बजट 2026 के माध्यम से सरकार ने सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की दरों में उल्लेखनीय वृद्धि कर दी है। सरकार का मुख्य उद्देश्य ट्रेडिंग की लागत बढ़ाकर उन रिटेल निवेशकों को हतोत्साहित करना है, जो बिना पर्याप्त जानकारी के रातों-रात अमीर बनने के चक्कर में अपनी गाढ़ी कमाई गंवा रहे हैं। सेबी (SEBI) की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि F&O में हाथ आजमाने वाले 10 में से 9 निवेशकों को भारी आर्थिक चपत लग रही है।
क्या है नया टैक्स ढांचा?
सरकार ने बजट में ट्रेडिंग के विभिन्न वर्गों पर एसटीटी की दरों को संशोधित किया है:
- विकल्प (Options): ऑप्शंस ट्रेडिंग पर एसटीटी की दर को 0.0625% से बढ़ाकर 0.1% कर दिया गया है।
- वायदा (Futures): फ्यूचर्स सेगमेंट में अब निवेशकों को 0.0125% की जगह 0.02% एसटीटी का भुगतान करना होगा।
- उद्देश्य: इस टैक्स वृद्धि से ट्रेडिंग करना महंगा हो जाएगा, जिससे अनावश्यक ‘इंट्राडे’ सट्टेबाजी पर लगाम लगेगी।
छोटे निवेशकों का ‘दर्द’: SEBI के चौंकाने वाले आंकड़े
बाजार नियामक सेबी ने सरकार को आगाह किया था कि शेयर बाजार अब निवेश के बजाय सट्टेबाजी का केंद्र बनता जा रहा है:
- करोड़ों का नुकसान: पिछले तीन वर्षों में व्यक्तिगत निवेशकों को F&O में कुल ₹1.8 लाख करोड़ से अधिक का घाटा हुआ है।
- युवाओं की भागीदारी: घाटा उठाने वालों में सबसे बड़ी संख्या 20 से 30 वर्ष के युवाओं की है, जो सोशल मीडिया ‘इन्फ्लुएंसर्स’ के बहकावे में आकर बाजार में उतर रहे हैं।
- लागत का बोझ: टैक्स और ब्रोकरेज बढ़ने से छोटे ट्रेडर्स का बचा-खुचा मुनाफा भी खत्म हो रहा है, जिससे वे कर्ज के जाल में फंस रहे हैं।
बाजार विशेषज्ञों की राय: ‘कड़वी दवा’ है यह फैसला
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि हालांकि ट्रेडर्स इस फैसले से नाखुश हो सकते हैं, लेकिन बाजार की स्थिरता के लिए यह जरूरी था।
- संस्थागत निवेशकों पर असर: विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े संस्थागत निवेशक (HNI) इस बोझ को सह लेंगे, लेकिन छोटे ‘रिटेल’ ट्रेडर्स के लिए अब हर ट्रेड महंगा पड़ेगा।
- जुए जैसी प्रवृत्ति पर रोक: वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, F&O अब एक निवेश उपकरण के बजाय ‘कैसीनो’ जैसा होता जा रहा था, जिसे नियंत्रित करना अनिवार्य हो गया था।
निवेशकों के लिए बचाव के रास्ते
विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे सट्टेबाजी के बजाय लंबी अवधि के निवेश (Cash Segment) पर ध्यान दें।
- लर्निंग पर जोर: ट्रेडिंग शुरू करने से पहले तकनीकी विश्लेषण और जोखिम प्रबंधन (Risk Management) का ज्ञान होना अनिवार्य है।
- स्टॉप लॉस का उपयोग: यदि आप फिर भी ट्रेडिंग करते हैं, तो हमेशा ‘स्टॉप लॉस’ का उपयोग करें ताकि नुकसान सीमित रहे।
“हमारा लक्ष्य शेयर बाजार को एक सुरक्षित निवेश गंतव्य बनाना है। छोटे निवेशकों की सुरक्षा सर्वोपरि है, और STT में वृद्धि उन्हें अत्यधिक जोखिम भरे सौदों से बचाने की दिशा में एक सुरक्षात्मक कदम है।” — वित्त मंत्रालय, भारत सरकार





