नई दिल्ली। लोकसभा सीटों के प्रस्तावित परिसीमन को लेकर विपक्षी गठबंधन के सहयोगी दल द्रमुक और कांग्रेस के बीच मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं। दोनों दलों के नेताओं ने एक-दूसरे पर राजनीतिक अवसरवाद और मुद्दे पर अलग-अलग रुख अपनाने के आरोप लगाए हैं। इससे परिसीमन के मुद्दे पर विपक्षी एकजुटता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
द्रमुक सांसद दयानिधि मारन ने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी तमिलनाडु में परिसीमन का विरोध कर रही है, जबकि कांग्रेस शासित अन्य राज्यों में इस मुद्दे को लेकर अलग रुख दिखाई दे रहा है। उन्होंने कांग्रेस पर परिसीमन के मामले में दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
द्रमुक का कहना है कि परिसीमन का मुद्दा दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और उनके हितों से सीधे जुड़ा हुआ है। पार्टी इस बात को लेकर चिंतित है कि आबादी के आधार पर सीटों के पुनर्विन्यास से उन राज्यों को नुकसान हो सकता है, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है।
वहीं, कांग्रेस विपक्षी दलों के साथ मिलकर परिसीमन के मुद्दे पर साझा रणनीति बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी पहले भी द्रमुक समेत अन्य विपक्षी दलों के संपर्क में रहने की बात कह चुकी है। हालांकि, अब द्रमुक नेताओं की सार्वजनिक टिप्पणियों से दोनों सहयोगी दलों के बीच बढ़ती दूरी साफ दिखाई देने लगी है।
परिसीमन को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में भी गतिविधियां तेज हैं। राज्य में बुलाई गई सर्वदलीय सांसद बैठक को लेकर द्रमुक और कांग्रेस के रुख में अंतर देखने को मिला है। हाल के दिनों में द्रमुक ने ऐसी बैठक को लेकर अपनी असहमति जताई, जबकि कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया।
इस पूरे विवाद ने विपक्षी गठबंधन के भीतर समन्वय की चुनौती को सामने ला दिया है। आगामी लोकसभा परिसीमन को लेकर केंद्र की रणनीति और विभिन्न दलों के रुख के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस और द्रमुक इस मतभेद को किस तरह सुलझाते हैं और क्या संसद में दोनों दल इस मुद्दे पर साझा रुख कायम कर पाते हैं।





