वाशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने से जुड़े कानून के प्रावधानों को 60 दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। इस फैसले से भारत को बड़ी राहत मिली है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि भारत अगले दो महीने तक रूस से तेल खरीद सकता है। इस अवधि में अमेरिकी प्रशासन प्रतिबंधों और टैरिफ के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करेगा।
भारत की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखकर फैसला
भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में अमेरिकी टैरिफ लागू होने से भारत के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका थी। रुबियो ने कहा कि भारत अमेरिका का महत्वपूर्ण सहयोगी और साझेदार है। किसी देश के लिए रातोंरात अपने ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं को बदलना आसान नहीं होता। इसलिए इस मामले में सभी आर्थिक पहलुओं पर विचार करना जरूरी है।
60 दिनों में होगा आर्थिक प्रभावों का आकलन
रुबियो के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रशासन को यह समझने के लिए समय दिया है कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध और टैरिफ लगाने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था तथा वैश्विक ऊर्जा बाजार पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
इस दौरान ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर आगे की नीति पर विचार किया जाएगा। हालांकि, 60 दिनों की यह राहत स्थायी छूट नहीं है। भविष्य में अमेरिकी प्रशासन के फैसले के अनुसार स्थिति बदल सकती है।
भारत को क्यों मिली राहत?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। रूस से मिलने वाला कच्चा तेल देश की ऊर्जा आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अमेरिकी प्रतिबंधों और अतिरिक्त टैरिफ की आशंका के कारण तेल आयात की लागत तथा व्यापारिक संबंधों पर दबाव बढ़ सकता था।
ट्रंप के फैसले से भारत को फिलहाल अपनी ऊर्जा खरीद की रणनीति बनाए रखने और संभावित आर्थिक प्रभावों से निपटने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।
आगे अमेरिकी नीति पर रहेगी नजर
रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तथा कूटनीतिक चर्चाएं महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। अमेरिकी प्रशासन की 60 दिनों की समीक्षा पूरी होने के बाद आगे की नीति को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल, इस अस्थायी फैसले से भारत को राहत मिली है, लेकिन भविष्य में रूसी तेल की खरीद पर अमेरिकी नीति क्या होगी, यह आने वाले समय में तय होगा।





