नई दिल्ली: संसद के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच जारी टकराव के बीच, लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया था। चर्चा का विषय यह था कि विपक्ष के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक और सदन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर हस्ताक्षर क्यों नहीं किए? भाजपा ने इसे राहुल गांधी की ‘अनिच्छा’ और विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ में फूट के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया था। हालांकि, अब कांग्रेस पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी है और इसके पीछे की रणनीतिक व तकनीकी वजह स्पष्ट की है।
कांग्रेस का स्पष्टीकरण: रणनीतिक कदम या तकनीकी कारण?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और विधायी विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि राहुल गांधी के हस्ताक्षर न होने के पीछे कोई राजनीतिक मतभेद नहीं, बल्कि एक तय प्रक्रिया है:
- संख्या बल का प्रदर्शन: कांग्रेस का कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव के लिए आवश्यक न्यूनतम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर पहले ही पूरे हो चुके थे। इसमें राहुल गांधी का हस्ताक्षर होना अनिवार्य नहीं था, क्योंकि प्रस्ताव सामूहिक रूप से विपक्षी गठबंधन की ओर से लाया गया है।
- रणनीतिक नेतृत्व: पार्टी सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में हैं। वे इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने के बजाय सदन में इस पर होने वाली चर्चा का नेतृत्व करेंगे। उनके हस्ताक्षर न होने से प्रस्ताव की वैधानिकता पर कोई असर नहीं पड़ता।
- अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी: प्रस्ताव पर मल्लिकार्जुन खड़गे के करीबी नेताओं और अन्य विपक्षी दलों के प्रमुख सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जो गठबंधन की एकजुटता को दर्शाते हैं।
भाजपा का हमला और कांग्रेस का पलटवार
जैसे ही यह बात सामने आई कि हस्ताक्षर सूची में राहुल गांधी का नाम नहीं है, सत्ता पक्ष ने इसे मुद्दा बना लिया:
- भाजपा का तंज: भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी स्वयं इस प्रस्ताव को लेकर आश्वस्त नहीं हैं या फिर उन्हें गठबंधन के अन्य दलों का पूरा समर्थन नहीं मिल रहा है।
- कांग्रेस की सफाई: कांग्रेस महासचिव (संगठन) ने कहा कि भाजपा जानबूझकर मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसी बातें कर रही है। उन्होंने कहा कि पूरा विपक्ष एकजुट होकर स्पीकर के ‘एकतरफा’ रवैये के खिलाफ खड़ा है।
- गठबंधन की एकजुटता: विपक्षी दलों (TMC, DMK, और शिवसेना-UBT) ने भी स्पष्ट किया कि वे राहुल गांधी के नेतृत्व में एक साथ हैं और यह प्रस्ताव पूरी तरह सोच-समझकर लाया गया है।
क्यों लाया गया है अविश्वास प्रस्ताव?
विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए यह कदम उठाया है:
- आवाज दबाने का आरोप: विपक्ष का कहना है कि विपक्षी सांसदों के माइक बार-बार बंद किए जा रहे हैं और उन्हें महत्वपूर्ण विधेयकों पर बोलने का पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा।
- पक्षपातपूर्ण रवैया: सांसदों का आरोप है कि स्पीकर नियमों का हवाला देकर केवल विपक्ष को अनुशासित करते हैं, जबकि सत्ता पक्ष के उल्लंघन पर चुप्पी साध लेते हैं।
- निलंबन की कार्रवाई: हाल के दिनों में बड़ी संख्या में सांसदों के निलंबन को भी इस प्रस्ताव की एक मुख्य वजह बताया जा रहा है।





