Friday, March 6, 2026

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यूकेएसएसएससी परीक्षा में बड़ी तकनीकी खामी, सभी 445 केंद्रों पर लगे जैमर नाकाम, 5-जी नेटवर्क पर लगाम लगाने में विफल

देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की हाल ही में आयोजित स्नातक स्तरीय परीक्षा में पेपर लीक रोकने के लिए सभी 445 परीक्षा केंद्रों पर जैमर लगाए गए थे। लेकिन जांच में सामने आया है कि ये जैमर तकनीकी रूप से केवल 4-जी नेटवर्क को ही बाधित कर सकते थे। नतीजतन, प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में चल रहे 5-जी नेटवर्क पर इनका कोई असर नहीं हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक गंभीर तकनीकी चूक है, जिसने पूरे इंतजाम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

केवल 4-जी तक सीमित थे जैमर
आयोग ने इस बार विशेष सतर्कता बरतते हुए संवेदनशील केंद्रों तक ही नहीं, बल्कि सभी परीक्षा केंद्रों पर जैमर लगाए थे। इन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) की ओर से स्थापित किया गया था। हालांकि पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ कि ये जैमर सिर्फ 700 मेगाहर्ट्स से 2300 मेगाहर्ट्स तक की फ्रीक्वेंसी को ही रोक सकते हैं, जो 4-जी नेटवर्क के दायरे में आती है। जबकि 5-जी नेटवर्क कहीं अधिक ऊंची फ्रीक्वेंसी बैंड—3300, 3500 मेगाहर्ट्स और 24 गीगाहर्ट्स तक—पर काम करता है। ऐसे में 4-जी जैमर से 5-जी सिग्नल को बाधित करना संभव ही नहीं था।

जिस कक्ष से पेपर बाहर आया, वहां जैमर ठप
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब यह सामने आया कि जिस कक्ष से परीक्षा का प्रश्नपत्र बाहर गया, वहां जैमर काम ही नहीं कर रहा था। आयोग के सचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने बताया कि पर्यवेक्षक से मिली मौखिक शिकायत में कक्ष-22 में गड़बड़ी की बात कही गई थी। बाद में आई रिपोर्ट में कक्ष-9 में भी जैमर के न चलने की पुष्टि हुई। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच से स्पष्ट है कि पेपर लीक वाले कक्ष में जैमर सक्रिय नहीं था।
आयोग ने ईसीआईएल को भेजा पत्र
डॉ. बरनवाल ने बताया कि आयोग ने इस मामले में ईसीआईएल को पत्र भेजकर जवाब तलब किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को पहले भी इस बारे में अवगत कराया गया था और कैबिनेट सचिव की ओर से 4-जी व 5-जी दोनों नेटवर्क को कवर करने वाले अपडेटेड जैमर लगाने के निर्देश ईसीआईएल को दिए गए थे। बावजूद इसके, अधिकांश केंद्रों पर केवल 4-जी जैमर ही लगाए गए।
पेपर सुरक्षा पर फिर सवाल
इस घटनाक्रम ने परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। आयोग के पुख्ता इंतजामों के बावजूद तकनीकी खामी ने पेपर लीक को रोकने में बड़ी बाधा पैदा की। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक आधुनिक 5-जी जैमर उपलब्ध नहीं कराए जाते, तब तक इस तरह की घटनाओं को रोक पाना मुश्किल रहेगा।

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