नई दिल्ली: देश के मौसम चक्र में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कहीं चटख धूप खिल रही है, तो कहीं बर्फीली हवाएं और बारिश लोगों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने ताजा बुलेटिन जारी करते हुए अगले चार दिनों के लिए जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल तक देश के 9 राज्यों में बारिश और बर्फबारी का अलर्ट जारी किया है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण उत्तर भारतीय पहाड़ों में मौसम बिगड़ गया है, जिसका सीधा असर मैदानी इलाकों के तापमान पर भी पड़ने की संभावना है।
आज शनिवार को देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के कई रंग देखने को मिलेंगे:
- उत्तर भारत: दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और हरियाणा में सुबह के समय हल्का कोहरा देखने को मिला, लेकिन दिन में धूप खिलने से तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। हालांकि, शाम होते-होते ठंडी हवाएं ठिठुरन बढ़ा सकती हैं।
- पहाड़ी क्षेत्र: जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में आज हल्की से मध्यम बर्फबारी होने की संभावना है।
- दक्षिण और मध्य भारत: केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में आज गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।
मौसम विभाग ने आने वाले चार दिनों के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है:
- जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश: भारी बर्फबारी और बारिश के कारण भूस्खलन (Landslides) का खतरा बढ़ सकता है।
- उत्तराखंड: चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में ऊंचाई पर हिमपात और निचले इलाकों में हल्की वर्षा का अनुमान है।
- केरल और तमिलनाडु: पूर्वोत्तर मानसून की विदाई और स्थानीय मौसमी दबाव के चलते इन राज्यों में भारी बारिश का ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया है।
- कर्नाटक और आंध्र प्रदेश: तटीय क्षेत्रों में बिजली कड़कने के साथ मध्यम बारिश की चेतावनी दी गई है।
- अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम: पूर्वोत्तर के इन राज्यों में अगले 72 घंटों के दौरान छिटपुट बर्फबारी और बारिश जारी रह सकती है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एक नया पश्चिमी विक्षोभ हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है। इसके प्रभाव से:
- मैदानी इलाकों में असर: राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में रात के तापमान में $2$ से $3$ डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है।
- समुद्री गतिविधि: दक्षिण भारत के समुद्र तटीय इलाकों में हवा की गति $40$ से $50$ किमी प्रति घंटे
फरवरी के अंत में हो रहे इस बदलाव को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क किया है:
- फसलों की सुरक्षा: ओलावृष्टि की संभावना वाले क्षेत्रों में तैयार फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखने या ढकने की सलाह दी गई है।
- सिंचाई का प्रबंधन: दक्षिण भारत के किसानों से कहा गया है कि वे भारी बारिश के दौरान खेतों में जलभराव न होने दें।





