Tuesday, March 3, 2026

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‘मुझ जैसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री बना दिया… यह संविधान की ताकत है’: पीएम मोदी की देशवासियों को चिट्ठी

हर वर्ष 26 नवंबर को देशभर में मनाए जाने वाले संविधान दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम एक विस्तृत पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने संविधान के प्रति अपनी श्रद्धा, उससे मिली प्रेरणा तथा अपने व्यक्तिगत राजनीतिक सफर से जुड़े अनुभव साझा किए। प्रधानमंत्री ने याद किया कि 2015 में उनकी सरकार ने 26 नवंबर को ‘संविधान दिवस’ घोषित किया था, ताकि इस पवित्र दस्तावेज़ का सम्मान और अधिक सुदृढ़ हो सके।

पीएम मोदी ने अपने पत्र में कहा कि भारतीय संविधान की असाधारण शक्ति का प्रमाण यह है कि एक साधारण और आर्थिक रूप से सीमित परिवार से आने वाला व्यक्ति 24 वर्षों से अधिक समय तक लगातार सरकार का मुखिया बनकर देश की सेवा कर सकता है। उन्होंने लिखा कि उन्हें आज भी 2014 का वह क्षण स्मरण है, जब वे पहली बार संसद पहुंचे और लोकतंत्र के इस सर्वोच्च मंदिर की सीढ़ियों को स्पर्श कर सिर झुकाया। उन्होंने उल्लेख किया कि 2019 में चुनाव परिणामों के बाद संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में प्रवेश करते समय उन्होंने संविधान की प्रति को अपने माथे से लगाकर उसे नमन किया।

अपने पत्र में प्रधानमंत्री ने संविधान सभा के सभी सदस्यों को श्रद्धांजलि दी और विशेष रूप से डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. भीमराव आंबेडकर तथा कई महिला सदस्यों के योगदान को याद किया, जिनकी दूरदृष्टि ने संविधान को और भी मजबूत बनाया। उन्होंने संविधान की 60वीं वर्षगांठ पर गुजरात में आयोजित ‘संविधान गौरव यात्रा’ और इसकी 75वीं वर्षगांठ पर संसद में हुए विशेष सत्र सहित देशभर में आयोजित कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन आयोजनों में जनता की रिकॉर्ड भागीदारी ने लोकतांत्रिक मूल्यों को नई ऊर्जा प्रदान की।

प्रधानमंत्री ने इस वर्ष के संविधान दिवस को विशेष बताते हुए कहा कि यह अवसर सरदार पटेल और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ और श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत की जयंती जैसे ऐतिहासिक पड़ावों के साथ मेल खाता है। उन्होंने कहा कि ये महापुरुष हमें कर्तव्यों के महत्व की याद दिलाते हैं, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 51 (ए) में परिलक्षित है।

देश के भविष्य की दिशा पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सदी के शुरुआती 25 वर्ष बीत चुके हैं और अगले दो दशकों में भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे कर लेगा। वर्ष 2049 में भारत के संविधान को अंगीकृत हुए भी एक सदी पूरी हो जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज लिए जाने वाले निर्णय आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को निर्धारित करेंगे, इसलिए नागरिकों को अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि मानते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने वोट के अधिकार के विवेकपूर्ण उपयोग को लोकतंत्र की मजबूती का आधार बताया और सुझाव दिया कि स्कूल तथा कॉलेज संविधान दिवस पर 18 वर्ष के नए मतदाताओं का विशेष सम्मान करें। उन्होंने विश्वास जताया कि युवा जिम्मेदारी और गर्व की इस भावना से प्रेरित होकर देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को और सशक्त बनाएंगे।

पत्र के अंत में प्रधानमंत्री ने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे एक महान राष्ट्र के जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करने का संकल्प दोहराएं, ताकि भारत को विकसित और शक्तिसंपन्न राष्ट्र बनाने की दिशा में सामूहिक योगदान दिया जा सके।

संविधान दिवस पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रधानमंत्री मोदी ने संविधान निर्माताओं को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि हमारा संविधान मानव गरिमा, समानता और स्वतंत्रता को सर्वोच्च महत्व देता है। यह हमें अधिकार तो प्रदान करता ही है, साथ ही कर्तव्यों का स्मरण कराकर एक मजबूत लोकतंत्र की आधारशिला भी रखता है। उन्होंने सभी नागरिकों से संवैधानिक मूल्यों को अपने आचरण से मजबूत करने का आह्वान किया।

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